इटावा। पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक (आरआई) से नाराजगी जताकर 60 किलोमीटर दूर स्थित बिठौली थाने के लिए दौड़ लगाने और 45 किलोमीटर दूरी के बाद बेहोश हो जाने वाले दरोगा विजय प्रताप को निलंबित कर दिया गया है। ड्यूटी से गायब रहने और अनुशासनहीनता को कार्रवाई का आधार बनाया गया है।
एसएसपी संतोष कुमार मिश्रा ने निलंबन के फैसले के साथ दरोगा प्रकरण की जांच सीओ भरथना को सौंपी है। चर्चा है कि दरोगा बीहड़ क्षेत्र के थाने में पोस्टिंग से नाराज था।
अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण ओमवीर सिंह ने बताया कि मऊ जिले के थाना हलधर के सहूवारी गांव निवासी दरोगा विजय प्रताप पर पूर्व में आम लोगों व जनप्रतिनिधियों के साथ अभद्र व्यवहार के आरोप भी लगे थे। सोशल मीडिया पर दरोगा के राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के वीडियो अपलोड हुए थे। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के विरुद्ध टिप्पणियां लिखने की शिकायतें भी मिली थीं। इन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया था।
लिखित माफी मांगने और अनुशासनबद्ध रहने के दरोगा के संकल्प पर ड्यूटी जारी रखी गई थी। हिदायत के बाद भी ड्यूटी से गायब होने की आदत न सुधरने और अनुशासन की अनदेखी पर एसएसपी स्तर से दरोगा के निलंबन का निर्णय लिया गया है।
इटावा। विभागीय चर्चा है कि दरोगा विजय प्रताप सिंह बीहड़ क्षेत्र के बिठौली थाने में तैनाती नहीं चाहता था। वह किसी अन्य थानेे में पोस्टिंग का इच्छुक था। थाने से गैर हाजिरी के बाद दरोगा की पुलिस लाइन में आमद कराई गई।
वहां से जब उसे पुन: बिठौली थाने में ही तैनाती का आदेश मिला तो उसने नाराजगी जाहिर करने के लिए पुलिस लाइन से बिठौली थाने तक की दौड़ लगानी शुरू की थी। करीब 45 किमी दूर हनुमंतपुरा पहुंचकर बेहोश हो गया था। हालांकि दरोगा विजय प्रताप का कहना है कि बिठौली थाना प्रभारी से उसके वैचारिक मतभेद हो गए थे। इसलिए वह बिठौली थाने में नहीं जाना चाहता था।