इटावा। उदी के नगला अजीत गांव निवासी एक दुकानदार के बुखार पीड़ित बेटे के गले में दवा की गोली फंसने से जान चली गई। परिजनों ने झोलाछाप पर गलत दवा देने का आरोप लगाया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दवा की गोली गले में फंस जाने से मौत होने का कारण सामने आया है।
बढ़पुरा थाना क्षेत्र के नगला अजीत गांव निवासी रंजीत कुमार गांव में ही दुकान किए हैं। शनिवार को उनके चार साल के बेटे मयंक को बुखार चढ़ आया। शाम करीब 6 बजे वह अपने बेटे को लेकर रमी का वर गांव के एक झोलाछाप के पास गया। जिला अस्पताल पहुंचे चाचा शिवसिंह ने बताया कि दवा खिलाने पर मयंक की हालत और बिगड़ गई। उसे दोबारा उसी झोलाछाप के पास ले गए, तो उसने इमरजेंसी में ले जाने के लिए कहा और एक दूसरे मरीज को देखने की बात कहकर दुकान बंद करके चला गया।
ग्रामीणों ने उदी पुलिस चौकी को सूचना दी। चौकी प्रभारी बच्चे को पीएचसी ले गए। जहां डॉ. सुनील कुमार ने उसे मृत घोषित कर दिया। बढ़पुरा थाना प्रभारी निरीक्षक अंजन कुमार सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दवा की गोली गले में फंसने और उससे सांस न आने की वजह से मौत हुई है। इसमें झोलाछाप व परिजनों की लापरवाही रही है। फिलहाल मृतक के परिजनों ने कोई तहरीर नहीं दी है।
पुलिस के अनुसार झोलाछाप मूलरूप से बसरेहर क्षेत्र के मोहब्बतपुर गांव का रहने वाला है। वह पहले भटपुरा तिराहे पर अपना दवाखाना खोले हुए था। अब वह ससुराल में मकान बनाकर रह रहा है। वहीं पूर्व प्रधान पुष्पेंद्र पांडेय ने बताया कि यह झोलाछाप पहले भी कई लोगों की जान से खेल चुका है। एक लड़का तो इसकी दवाई से मरते मरते बचा था।