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इटावाः फिर जलने लगे चूल्हे, अरमान हुए धुआं

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चूल्हे पर खाना बनातीं कुमकुम। संवाद - फोटो : ETAWAH
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चकरनगर। रसोई गैस के बढ़ते दामों ने उज्जवला कनेक्शन धारकों को फिर चूल्हे जलाने के लिए मजबूर कर दिया है। सिलिंडर 1035 का होने पर घर का बजट बिगड़ रहा है।
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केंद्र सरकार ने गांव की महिलाओं को चूल्हे के धुएं के बचाने की मंशा से उज्जवला योजना शुरू की थी। इसके अंतर्गत चकरनगर क्षेत्र के सात हजार परिवारों को मुफ्त कनेक्शन देकर चूल्हा और सिलिंडर दिया गया था। इसके बाद गांव की महिलाओं को काभी सहूलियत हुई थी। पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ रहे सिलिंडर के दाम से आर्थिक स्थित बिगड़ने पर फिर महिलाओं ने चूल्हों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। लोग एक हजार का सिलिंडर भरवाने में असमर्थ हैं। ऐसे में फिर एक बार गांवों में चूल्हे जलने लगे हैं। अप्रैल से जुलाई प्रथम सप्ताह तक डेढ़ सौ रुपये रसोई गैस पर बढ़ोतरी हुई है।
चकरनगर कस्बे की बन्नी बेगम ने बताया कि बड़ा परिवार होने के कारण एक माह में ही रसोई गैस खत्म हो जाती है। अब हर महीने एक हजार से अधिक का सिलिंडर भरवाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में अब फिर चूल्हे पर ही खाना बनाना शुरू कर दिया है। गांव पसिया की कुमकुम ने बताया कि रसोई गैस कनेक्शन मिलने पर खुशी हई थी। पिछले कई माह से सिलिंडर के दाम ने फिर चूल्हे की याद दिला दी है। हर महीने सिलिंडर भरवाने से आर्थिक दबाव रहता है।
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गैस एजेंसी संचालक वरुण पांडे ने बताया कि अप्रैल में 982 रुपये का सिलिंडर था। अप्रैल माह में बिक्री का आंकड़ा 2270 सिलिंडर का है। जून में सिलिंडर के दाम 1, 035 रुपये होने पर यह आंकड़ा 18 सौ पर आ गया। जून व जुलाई के प्रथम सप्ताह में तक बिक्री 1500 सिलिंडर की रह गई है। 30 प्रतिशत से अधिक बिक्री में गिरावट आई है।
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