इटावा। बसरेहर के अड्डा नावली की मोना कुशवाहा ने बेमौसम सब्जियां उगाकर अपने जीवन को खुशहाल बना लिया है। अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ ही वह अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रहीं हैं।
बीए पास मोना कुशवाहा ने बताया 2013 में उनकी शादी जितेंद्र कुमार कुशवाहा से हुई थी। पति विरासत में मिली चार बीघा खेती में गेहूं और धान की पारंपरिक फसल कर साल भर में 70 से 80 हजार रुपये ही कमा पाते थे। 2 जुलाई 2019 को वह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी और आधुनिक खेती का प्रशिक्षण लिया। सबसे पहले मल्चिंग बेड विधि (खेत की मिट्टी को ढककर खरपतवार से बचाते हुए) से खीरा, तरबूज, करेला और मूली उगाई। इससे वह सालाना चार लाख तक का मुनाफा कमा रहीं हैं। चार बीघा जमीन में खीरा, तरबूज, करेला की बेमौसम सब्जी उगा रहीं हैं। मोना ने 40 महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़कर स्वरोजगार दिया। इनमें से 10 महिलाएं राशन वितरण में सहयोग कर रही हैं। उन्होंने अपनी उपज की कई बार प्रदर्शनी लगाई है। इसके लिए उन्हें तीन बार जिला स्तरीय पुरस्कार मिल चुका है।
मोना ने बताया कि दो बीघे खेत में अक्टूबर से दिसंबर तक करेला, खीरा और तरबूज की बेमौसम फसल उगाई थी। दो बीघा खेत में फसल की लागत 40 हजार रुपये आई थी। मुनाफा चार गुना एक लाख 60 हजार रुपये हुआ।
मल्चिंग बेड की विधि की जानकारी देते हुए मोना ने बताया इस विधि से साल में एक बार ही खेत में जुताई करनी पड़ती है। इस विधि से खेत में होने वाली फसल में खरपतवार नहीं होता है। सिंचाई भी कम करनी पड़ती है। फसल भी अच्छी हो जाती है। पहले हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। अब अधिक मुनाफा होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।