चकरनगर। पेयजल संकट के कारण ग्रामीण पानी के लिए चंबल नदी में मगरमच्छ और घड़ियालों के पास जाकर जान जोखिम में डाल देते हैं। दरअसल गर्मियों में बालू के अंदर अंडे होने के कारण मगरमच्छ अैर घड़ियाल आक्रामक रहते हैं। इसलिए वह लोगों को अपना शिकार बना लेते हैं।
गुरुवार को चंबल नदी में जानवरों को पानी पिलाने गई भरेह थाना क्षेत्र के ख्यालीपुरा गांव की मुस्कान को मगरमच्छ ने पना निवाला बना लिया था। सेंचुरी विभाग गर्मी के मौसम में लोगों को चंबल नदी की तरफ न जाने के लिए जागरूक करता रहता है। लोगों को बताया जाता है कि गर्मी में घड़ियाल और मगरमच्छ बालू में अंडे सुरक्षित रखते हैं। इस वजह से इस समय सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक आक्रामक रहते हैं। फिर भी ग्रामीण घरेलू जानवरों को पेयजल की समस्या के चलते यह जोखिम उठाते हैं। कई बार तो आसपास के लोग नदी में नहाते दिख जाते हैं।
वर्ष 2020 में गर्मियों के दिनों में ही गांव हरपुरा में महिपाल सिंह निषाद के 10 वर्ष के बेटे अनुज को जानवरों को पानी पिलाते समय मगरमच्छ ने अपना निवाला बना लिया था। चंबल नदी के किनारे ढकरा, सहसो, नदा, मिटाहटी, पिपरौली गुढिया, राउनी वंशरी गांवों में अब तक कई लोग मगरमच्छ का शिकार बन चुके हैं।
मृतक मुस्कान के पिता विक्रम मल्लाह का कहना है कि गांव में अगर पानी की व्यवस्था होती तो उसकी बेटी जिंदा होती। भीषण गर्मी में बिजली कटौती के कारण पानी की ज्यादा समस्या चल रही है। मैने अपनी बेटी को खोया है। इससे लोग सबक लें। कोई भी व्यक्ति नदी किनारे अपने बच्चों को न भेजे। स्वयं ही जानवरों की देखभाल करें।
एसडीएम चकरनगर मलखान सिंह ने बताया कि राजस्व टीम ने जाकर मौका मुआयना किया है। मृतक के परिवार को सहायता दिलाने के लिए सेंचुरी विभाग को पत्र लिखा गया है। नियमानुसार पीड़ित को आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी। सीओ चकरनगर राकेश वशिष्ठ व थानाध्यक्ष हरि गोविंद वर्मा ने घटनास्थल पर जाकर परिजनों से जानकारी लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
चंबल सेंचुरी डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया चंबल नदी राष्ट्रीय अभ्यारण खुला है। इसमें वन्यजीव व जलीय जीव सभी को खुला रहने दिया जाता है। नदी में कहीं भी बैरीकेडिंग नहीं की जा सकती है। लोगों को निरंतर जागरूक किया जाता है कि वह नदी किनारे व बीहड़ क्षेत्र में सुरक्षित तरीके से जाएं। मगरमच्छ, घड़ियाल, तेंदुआ, लकड़बग्घा विचरण करते रहते हैं। पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी।
ग्राम पंचायत पथरहा के प्रधान प्रतिनिधि भूप सिंह निषाद ने कहा कि पशुओं को जंगल में चराना, पानी पिलाना दैनिक क्रिया है। पानी संकट से निजात दिलाकर प्रशासन लोगों की जान से खिलवाड़ रोक सकता है। ग्राम पंचायत पथरहा के निवासी सरमन सिंह सेंगर का कहना है सेंचुरी विभाग को नदी किनारे आम जनता के प्रयोग के लिए पानी की सुरक्षित व्यवस्था करनी चाहिए। इससे लोगों को मगरमच्छ व घड़ियाल का निवाला बनने से रोका जा सकता है।