तहसील का दर्जा प्राप्त ताखा गांव को जाने वाला टूटा फूटा रास्ता
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ताखा। गांव ताखा के नाम पर पंचायत बनी फिर ब्लॉक और तहसील। फिर भी गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। छह हजार की आबादी वाला यह गांव विकास से अछूता है। गांव में जाने के लिए सड़कों का निर्माण 15 सालों से नहीं हुआ है। लोगों को टूटी और उखड़ी सड़कों के सहारे गांव आना और जाना पड़ता है। पानी की भी उचित व्यवस्था नहीं है।
ग्रामीण पेयजल परियोजना के तहत गांव में पानी की टंकी तो बनाई गई लेकिन पिछले दो साल से आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। आरओ प्लांट भी लगाया गया लेकिन एक साल से ताला लटक रहा है। क्षेत्रीय विधायक से लेकर किसी भी पार्टी के नेता ने इस गांव की कोई सुध नहीं ली है। गांव में जल निकास की उचित व्यवस्था न होने के कारण गंदा पानी गलियों में नजर आता है।
बाबी राठौर का कहना है कि गांव में बिजली के अलावा कोई मूलभूत सुविधा नहीं है। गांव में एक बैंक है लेकिन उसमें भी सर्वर की समस्या बनी रहती है। गांव विकास के नाम पर पिछड़ा हुआ है। पंकज यादव ने कहा कि गांव में कुछ सुविधाएं हैं। वह भी देखरेख के अभाव में खत्म होने की कगार पर हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर दो वर्ष से डॉक्टर नहीं है। इलाज के लिए उमरैन या भरथना जाना पड़ता है। शिवपाल सिंह का कहना है कि गांव के लिए अच्छी सड़क की कोई व्यवस्था नहीं। पूरी तरह से खराब सड़क पर चलने में काफी परेशानी होती है। ताखा के नाम पर बहुत कुछ हुआ लेकिन गांव के लिए कुछ नहीं किया गया।