इटावा। जिले में मुख्यत: आलू और धान की फसल होती है, लेकिन दोनों ही क्षेत्र में किसानों को मायूसी हाथ लगी है। यहां हर साल 20 हजार हेक्टेयर आलू की खेती की जाती है। किसानों का कहना है कि यमुना और चंबल के किनारे बसे किसानों पर रहमत नहीं बरसी। आलू आधारित उद्योगों की मांग इस क्षेत्र में लंबे अरसे से हो रही है। इस पर कोई काम नहीं हुआ। धान मिलों के पुनरुत्थान की कोई कोशिश नहीं हुई। खेती के पारंपरिक तरीकों को छोड़कर विविधीकरण तकनीकी अपनाने की तो बातें हर बजट में होती है। इससे किसानों का कोई भला नहीं होता।
जिले में रबी की प्रमुुख फसल आलू, गेहूं और सरसों है। आलू का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। किसानों के पास औने-पौने दामों में आलू बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। कोल्ड स्टोरेज में जरूरत के हिसाब से आलू रखा जाता है। इस क्षेत्र में आलू आधारित कोई उद्योग लग जाता तो आलू किसानों की मुंह मांगी मुराद पूरी हो जाती। यही हाल खरीफ की धान की फसल का है। खरीफ में बड़े पैमाने पर धान की फसल होती है। धान मिलें ज्यादातर बंद हो रहीं है। सरकार ने जब से लेवी का चावल लेना बंद किया धान मिलें एक के बाद एक बंद हो रही है। धान मिल उद्योग की भी कोई चर्चा नहीं हुई।