खानपान में लापरवाही, अनियमित लाइफ स्टाइल, शारीरिक श्रम में कमी तथा मानसिक तनाव डायबिटीज के प्रमुख कारण हैं। संतुलित भोजन, व्यायाम व दवाओं के सेवन से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
यह बातें वर्ल्ड डायबिटीज-डे पर उप्र ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान में मेडिसिन विभाग एवं विलियम आस्लर हेल्थ फाउंडेशन के कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डा. (ब्रिगे) टी प्रभाकर ने कहीं।
संस्थान के निदेशक ने बताया कि डायबिटीज अत्यधिक नशा, तनाव और अनुवांशिकता के कारण भी हो सकता है। वर्तमान में 66 मिलियन से भी ज्यादा भारतीय इस रोग से पीड़ित हैं, अगर इस पर ध्यान न दिया गया तो 2030 तक देश में इन रोगियों की संख्या 100 मिलियन को पार कर सकती है।
विलियम आस्लर हेल्थ फाउंडेशन से जुड़े डा. सुशील कुमार यादव तथा मेडिसिन विभाग के डा. मनोज कुमार ने बताया कि बार-बार पेशाब आना, सामान्य से अधिक प्यास व भूख लगना, वजन कम होना तथा हाथ-पैरों का सुन्न होना तथा हर समय थकान महसूस कराना डायबिटीज के प्रमुख लक्षण हैं।
मधुमेह का सही समय में नियंत्रण न होने से रोगी के आंखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने की संभावना बढ़ जाती है। इस मौके पर मेडिसिन विभाग के विभागध्यक्ष प्रो पीएस सिंह, विलियम आस्लर हेल्थ फाउंडेशन के डा. सुशील कुमार यादव तथा मेडिसिन विभाग के डा. मनोज कुमार, डा. केएस जफर तथा डा. मनीष गुप्ता ने लोगों को मधुमेह के बारे में जानकारियां दीं।