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परिवार को जागरूक कर जीत सकते हैं कोरोना से जंग

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जिले में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या में शासन प्रशासन के साथ ही आम लोगों को भी चिंता में डाल दिया है। कोरोना से जंग में सबसे बड़ा हथियार धैर्य, सतर्कता और जागरूकता हैं।
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शहर की प्रथम नागरिक से लेकर सभी दल की नेताओं ने परिवार, पड़ोसियों से समाज के हर व्यक्ति को जागरूक करेंगी।
इसकी शुरुआत अपने घर से ही करेंगी। परिवार के किसी भी सदस्य को बिना मास्क घर से नहीं निकलने देंगी और बिना काम के भी बाहर नहीं जाने देंगी।
समाज की अग्रिम पंक्ति की इन महिलाओं का कहना है कि अगर महिलाएं थोड़ा सा ध्यान दे दें तो कोरोना को आसानी से हराया जा सकता है।
शहर की प्रथम नागरिक अध्यक्ष नगर पालिका नौशाबा फुरकान ने कहा कि अध्यक्ष होने के नाते पूरे शहर को जागरूक करना उनका फर्ज है। इस काम में वह लॉकडाउन के साथ ही लगी हैं।
शहर की प्रत्येक महिला घर से किसी भी सदस्य पर नजर रखे। उन्हें बिना मास्क बाहर न जाने दें। मास्क न हो तो मुंह पर तीन लेयर का कपड़ा जरूर बंधवाएं। पति, बच्चे, देवर, भाई, पिता और ससुर को घर से निकलते समय जरूर टोकें कि बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। घर लौटने पर बाहर ही हाथ धुलवाएं।
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भाजपा पिछड़ा वर्ग की जिलाध्यक्ष विरला शाक्य ने कहा कि जिले में बढ़ती कोरोना मरीजों की संख्या चिंतित करने वाली है, लेकिन डरने की जरूरत नहीं है। हम सभी को धैर्य से काम लेना चाहिए।
महिलाएं घर के सभी सदस्यों को इस बात के लिए जागरूक करें कि घर के बाहर रहने के दौरान किसी वस्तु को बेवजह न छुएं। हाथों को मुंह, नाक और आंख में बिल्कुल न लगाएं। बिना मास्क के परिवार के किसी भी सदस्य को बाहर न निकलने दें।
जिला महिला कांग्रेस की पूर्व जिलाध्यक्ष कुसुमलता उपाध्याय ने कहा कि कोरोना ने पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है। महिलाओं में हर मुश्किल को मात देने की क्षमता होती है। जरूरी है कि परिवार के प्रत्येक सदस्य पर नजर रखें।
बाहर निकलने समय मास्क और सामाजिक दूरी का पाठ परिवार के प्रत्येक सदस्य को पढ़ाना है। पड़ोसियों को भी बिना मास्क बाहर न निकने की अपील करें। घर में घुसते परिवार के लोगों से साबुन से हाथ धोने के लिए कहें।
सपा महिला सपा की जिलाध्यक्ष लीलावती राजपूत सभासद भी हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक महिला को बस यही करना है। अगर हमारे घर में कोई बाहर से आए तो उसकी जांच कराएं, बस 14 दिन अलग कमरे में रखें।
पड़ोस में कोई बाहर से आए तो उसे भी जांच के लिए प्रेरित करें। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का हथियार लेकर ही परिवार के सदस्यों को बाहर निकलने दें।
केके पीजी कॉलेज में अर्थशास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ पदमा त्रिपाठी का कहना है कि महिलाएं जरूरतमंदों के लिए मास्क बनाएं और दूसरों को भी प्रेरित करें। बच्चों के साथ घर के प्रत्येक सदस्य मास्क लगाने को कहें।
महिलाएं बच्चों की प्रथम शिक्षक भी होती हैं, वह परिवार से जागरूकता का अध्याय शुरू करें और पड़ोसियों से लेकर मोहल्लों तक पढ़ाएं। बुजुर्ग महिलाएं युवाओं व बच्चों को बिना मास्क देखने पर विनम्रता के साथ टोकें।
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