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एक साल में तीसरी बार मानदेय वृद्घि की घोषणा, मिला अभी तक नहीं

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इटावा। स्कूलों में मिड डे मील पकाने वाली रसोइयां करीब एक वर्ष से आश्वासन का लालीपॉप चांट रही हैं। सरकार एक वर्ष में तीन बार उनका मानदेय बढ़ाने की घोषणा कर चुकी है लेकिन अभी तक मानदेय बढ़ाया नहीं गया है। इतना ही नहीं पहले से लागू मानदेय भी छह महीने से नहीं मिला है।
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जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 1486 के अलावा 21 राजकीय और 54 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों के लिए मिड डे मील बनाया जाता है। भोजन पकाने के लिए 3820 रसोइयां तैनात हैं। इन रसोइयों को 1500 रुपये मासिक मानदेय मिलता है। पिछले वर्ष अप्रैल में सरकार ने मानदेय में वृद्धि करने की घोषणा की थी। विधानसभा चुनाव के पहले और इसी महीने फिर 500 रुपये बढ़ाने की घोषणा कर दी किंतु मानदेय वृद्धि लागू नहीं की गई।
बढ़ना तो दूर समय पर मानदेय मिल भी नहीं पा रहा है। छह महीनों से रसोइयों को मानदेय नहीं मिला है। पिछले वर्ष अक्टूबर में मानदेय दिया गया था। रसोइया कर्मचारी यूनियन के प्रांतीय नेता अमर सिंह शाक्य ने सरकार मानदेय वृद्धि की घोषणा बार-बार करके सिर्फ दिखावा कर रही है। उन्होंने मानदेय वृद्धि अप्रैल 2021 से लागू करने की मांग भी की है।
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हर महीने मिलना चाहिए मानदेय
रसोइया सुमन देवी का कहना है कि रसोइयों को हर महीने मानदेय मिलना चाहिए। कई-कई महीने बाद मानदेय मिलता है। छुट्टियां के साथ फंड ,बोनस ,बीमा की सुविधा भी मिलनी चाहिए। खाना बनवाने के अलावा दूसरा काम भी न लिया जाए।
हमेशा भेदभाव किया जाता है
रसोइया नीलम का कहना है कि सरकार को पिछले साल से मानदेय वृद्धि का लाभ देना चाहिए। हमारे साथ हमेशा भेदभाव किया जाता है। सरकार की ओर से कोई सुविधा नहीं मिलती। छुट्टी की सुविधा भी नहीं है। सरकार को सेवा नियमावली बनानी चाहिए।
एक महीने का मानदेय नहीं मिलता
रसोइया अनीता देवी ने कहा कि पूरे वर्ष हम लोग काम करते हैं लेकिन मानदेय 11 महीने का ही दिया जाता है। छह-छह महीने तक खातों में पैसा नहीं आता है। ऐसे में तमाम आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता है। नियमित भुगतान का इंतजाम होना चाहिए।
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