इटावा। बेसिक शिक्षा परिषदीय विद्यालयों में फर्जी अभिलेखों के सहारे नौकरी कर रहे करीब 30 शिक्षकों पर गाज गिरने वाली है। शासन के आदेश पर गठित एसआईटी की जांच पूरी हो चुकी है। अब सिर्फ आदेश जारी होना बाकी है। नया साल फर्जी शिक्षकों पर भारी पड़ने वाला है।
शासन ने पूरे प्रदेश में 2007 से 2013 तक नियुक्त हुए शिक्षकों की एसआईटी से जांच के आदेश दिए हैं। एसआईटी में एडी बेसिक कानपुर, एडीएम, एएसपी को शामिल किया गया। जिले में इस अवधि में तैनात शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों की जांच कराई गई। जांच के दौरान 72 शिक्षकों के अभिलेख संदेहजनक मिले। इनमें कुछ अभ्यर्थियों की टीईटी की मार्कशीट सही नहीं थी। कुछ अभ्यर्थियों की वर्ष 2005 की आगरा विश्वविद्यालय की डिग्री संदेहपूर्ण मिली। एडीएम स्तर से लेखपालों की टीम को रह विश्वविद्यालय एवं कॉलेज में शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन के लिए भेजा गया। लेखपालों ने जांच में 72 शिक्षकों के अभिलेखों में हेराफेरीे पकड़ी। इनमें से 60 शिक्षक जिले में ही तैनात हैं, जबकि 12 शिक्षक दूसरे जिलों मेें तबादले पर गए हैं। बीएसए अजय कुमार सिंह ने सभी 60 शिक्षकों का अक्तूबर 2019 से वेतन रोक दिया। अन्य 12 शिक्षकों के बारे में संबंधित जिलों के बीएसए को सूचना दे दी।
जांच के दौरान अभ्यर्थियों को भी नोटिस जारी किए गए। उनसे भी जवाब मांगा गया। अभ्यर्थियों ने जांच समिति को यह लिखकर दिया कि उनका आनलाइन सत्यापन सही नहीं हुआ है। आफलाइन सत्यापन करा लिया जाए। जांच समिति ने उनका पुन: आफलाइन सत्यापन कराने को फिर से लेखपालों की टीम नियामक प्राधिकारी परीक्षा प्रयागराज कार्यालय को भेजा। वहां से सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद दिसंबर के प्रारंभिक सप्ताह में एसआईटी ने टीईटी वाले 10 एवं बीएड वाले 20 शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेख फर्जी मिलने पर उनकी बर्खास्तगी की संस्तुति कर दी। अब बर्खास्तगी की फाइल बीएसए कार्यालय में है। बीएसए को इस संबंध में आदेश जारी करना है। जनवरी के दूसरे या तीसरे सप्ताह में फर्जी अभिलेखों के सहारे नौकरी करने वाले 30 शिक्षकों की बर्खास्तगी का आदेश निर्गत हो सकता है।
बीएसए अजय कुमार सिंह ने बताया कि जांच प्रक्रिया चल रही है। परिणाम के बारे में अंतिम निर्णय होते ही जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी।