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बारिश के चलते आलू बुवाई में दस दिन की देरी

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बकेवर। दो दिन की बारिश ने आलू की फसल की बुवाई में दस दिन की देरी कर दी है। अगेती फसल रखने की चाहत रखने वाले किसानों को निराशा हाथ लगी है। किसानों के अनुसार अब 30 अक्तूबर के आसपास से ही आलू की बुवाई शुरू होगी। 8 से 10 दिन खेतों का पानी सूखने में लग जाएगा।
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बकेवर, लखना, महेवा, इकदिल क्षेत्र में काफी मात्रा में किसान आलू की पैदावार करते हैं। सितंबर माह से अगेती (कच्ची खोद) रख जाती है। इस बार सितंबर माह में भी अंतिम और मध्य सप्ताह में और इसके बाद अक्तूबर में बारिश से आलू की अगेती बुवाई नहीं हो पाई। अक्तूबर माह में 20 अक्तूबर से आलू की बुवाई शुरू हो जाती है। इस बार इस समूचे क्षेत्र में अक्तूबर माह के तीसरे सप्ताह से आलू की बुवाई शुरू हो पाना संभव नहीं है।
बकेवर लखना क्षेत्र में तमाम किसानों ने बीज भी तैयार रखा था। अगर पानी नहीं बरसता तो एक-दो दिन में वह अपनी बुवाई करा देते। आलू किसान राजू तिवारी कहते हैं कि अब कच्ची और पक्की दोनों फसलें एक हो गई हैं। आलू की बुवाई 30 अक्तूबर के पहले संभव नहीं दिख रही है।
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कुड़रिया निवासी किसान गोरे लाल कहते हैं इस बार एक तो आलू में अच्छा भाव न मिलने से नुकसान हुआ। वहीं अब आलू बुवाई के समय पानी ने खेल बिगाड़ दिया है। पहले क्रम से आलू की बुवाई होने से अधिक खाद बीज जुताई का एक साथ लोड नहीं पड़ता था। अब अधिकांश आलू की बुवाई एक साथ ही होगी। अससे किसानों को आलू रखने में समस्या आएगी।
बकेवर। पानी बरसने से सरसों की फसल की तैयारी कर रहे कई किसानों को बीज का नुकसान हुआ है। रविवार और सोमवार को हुई बारिश से इस बार धान की पिछेती फसल को छोड़कर अन्य सभी फसलों को नुकसान बताया जा रहा है। किसानों का कहना है कि जिन किसानों ने सरसों की बुवाई दो-चार दिन पहले की थी। बारिश के कारण अब उन सभी खेतों में किसानों को सरसों दोबारा से बोनी पड़ेगी। तमाम किसानों को जुताई का भी खर्च दोबारा उठाना पड़ेगा।
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