एक गरीब किसान ने अपनी पट्टे जमीन के साथ हेराफेरी होने की शिकायत मुख्यमंत्री के पोर्टल पर की है। किसान का कहना है कि खतौनी निकलवाने पर उसे इसकी जानकारी हुई।
इसमें पता चला कि उसने उक्त पट्टे की जमीन पर चार लाख 68 हजार का ऋण ले रखा है जबकि उसने कोई ऋण नहीं लिया है। उसके अभिलेखों में हेराफेरी की गई है। पीड़ित किसान दंपति ने मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है।
थाना क्षेत्र के थरी गांव निवासी पीड़ित किसान मान सिंह पुत्र रामस्वरूप ने बताया कि गत दिवस वह खतौनी निकलवाने के लिए तहसील गया था। जब खतौनी उसके हाथ में आई तो खतौनी संख्या 01055 में भूमि स.0 454 रकवा 0.3930 हेक्टेयर में उसकी जमीन को बंधक किए जाने की बात भी अंकित दिखी।
खतौनी में दर्शाया गया कि उसकी पट्टे की जमीन को भरथना शाखा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंधक के आदेश पर बंधक बनाया गया है। उसने उक्त पट्टे भूमि पर चार लाख 68 हजार रुपये का कर्जा लिया है।
यह देखकर वह अवाक रह गया। किसान मानसिंह का कहना है कि उसने अब तक किसी भी बैंक से कोई ऋण अथवा क्रेडिट कार्ड नहीं लिया है।
राजस्व विभाग के आर रजिस्टर में खाता सं 1055 के तहत उक्त भूमि असंक्रमणीय भूमि के तौर दर्ज है। पीड़ित ने कहा कि उसकी पट्टे की जमीन के साथ कोई हेराफेरी की गई है। जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पीड़ित ने बैंक अधिकारियों पर भी साठगांठ करने का आरोप लगाया।
भूमि प्रबंधन समिति मौजा थरी के द्वारा कृषि पट्टा भूमि सं. 454 रकवा 0.3930 हेक्टेयर का असंक्रमणीय भूमि के तौर पर आवंटन किया गया। इसकी खतौनी सं. 01055 पर पीड़ित किसान का नाम दर्ज है। किसान की पत्नी मंजू देवी ने भी उक्त बैंक से किसी प्रकार का कोई ऋण लेने से इंकार किया।
इस मामले में सेंट्रल बैंक भरथना शाखा के मैनेजर दिलीप यादव ने बताया कि अभी यह मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। यदि उक्त पीड़ित उनके पास आता है तो वह प्रकरण को देखेंगे कि कहां पर त्रुटि हुई है और वास्तविक रूप से क्या हुआ है।