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कांवरियों की सेवा में लगे रहे श्रद्धालु तीन समाचार

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महाशिवरात्रि पर कांवरिये भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने को लेकर जय भोले, बम- बम भोले के जयकारा लगाते आते रहे। उनके स्वागत में जगह-जगह फलाहार भंडारा आयोजित किया गया।
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बकेवर बाईपास फ्लाई ओवरब्रिज के नीचे कांवरियों के स्वागत में फल, दूध, चाय, काफी, गन्ने का रस, गुड़ तथा पानी की व्यवस्था के अलावा प्राथमिक उपचार का पूरा प्रबंध किया गया।

इस व्यवस्था में आलोक चतुर्वेदी, प्रशांत पाठक, अमित अग्निहोत्री, कपिल पांडेय, शिक्षक प्रद्युम्न दुबे, कपिल पांडेय, ब्रजेंद्र दुबे, प्रियांश पाठक, विष्णु त्रिपाठी, गोपाल तिवारी, विजय दीक्षित, शैलेंद्र त्रिपाठी, मनीष त्रिपाठी आदि सेवा कार्य में लगे रहे। ब्यूरो
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लखना-चकरनगर मार्ग स्थित सब्दलपुर गांव के पास जंगल में महाभारत कालीन हमीरपुरा का हिडंबेश्वर महादेव का मंदिर इस क्षेत्र में द्वापर युग में घटित महाभारत की घटना का मूक बखान कर रहा है। इस मंदिर में पांडवों द्वारा स्थापित शिवलिंग लोगों की शिव भक्ति की आस्था का प्रतीक बन चुका है। मान्यता है कि इस मंदिर पर कांवर चढ़ाने वालों की मनौती पूरी होती है।

मंदिर के महंत बाबा सुरजनदास बताते हैं कि इस स्थान का महत्व महाभारत के आदि पर्व में वर्णित किया गया है। इसका उल्लेख इष्टकापुरी के नाम से आया है।

बताया जाता है कि लाक्षागृह की घटना के बाद जब पांडव गोपनीय ढंग से विचरण करने लगे तो इसी स्थान पर रात्रि पांडव के चार भाई व मां कुंती एक पेड़ के नीचे भूखे-प्यासे सो रहे थे। भीम पहरा दे रहे थे।

पास ही एक पेड़ पर हिडंव और उसकी बहन हिडंवा निवास कर रहे थे, यह दोनो नरभक्षी थे, पांडवों का मांस खाने के लिए दोनों ने उन पर आक्रमण करना चाहा। इस पर युद्ध हुआ और भीम ने हिडिंब को मार गिराया,

लेकिन उसकी बहन भीम पर मोहित हो गई। बाद में भीम और हिडिंबा ने गंधर्व विवाह करके इसी स्थान पर पुत्र की अभिलाषा में भगवान शंकर की आराधना करके शिवलिंग की स्थापना की। भगवान शंकर की कृपा से उनके घटोत्कच नाम का महाबली पुत्र हुआ।
महाभारत काल में पांडवों ने चक्रनगरी अर्थात चकरनगर में अज्ञातवास किया। बकेवर में बकासुर नाम के राक्षस का वध किया था। क्षेत्र में चाहे राक्षसों का खौफ रहा हो या डकैतों का, इस दुर्गम जंगल में भी लोग हमीरपुरा के मंदिर में बिना किसी भय के आराधना करने आते रहे।
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मंदिर पर होगी भजन कीर्तन की धूम
महेवा। महाशिवरात्रि के पर्व पर क्षेत्र के बहेड़ा गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर में भजन कीर्तन के साथ कांवर चढ़ाई जाएगी। मंदिर के व्यवस्थापक विजय प्रताप सिंह सेंगर ने बताया कि मंदिर पर कांवर चढ़ाने वालों के लिए सुविधा की गई है।
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