चकरनगर। बीहड़ क्षेत्र में यमुना का जलस्तर अचानक बढ़ने से दर्जन भर गांवों की करीब 60 एकड़ गेहूं और सरसों की फसल पानी में डूबने से खराब हो गई।
डिभोली घाट से लेकर भरेह संगम तक यमुना के किनारे सैकड़ों बीघा में ग्रामीण खेतीबाड़ी करते हैं। बाढ़ के दौरान उपजाऊ मिट्टी खेतों और किनारों में नदी छोड़ जाती है, जिसमें किसान गेहूं और सरसों की फसल बोते हैं।
पिछले हफ्ते यमुना नदी का बेमौसम बरसात होने से आंशिक रूप से जलस्तर बढ़ गया। नदी अपनी धारा से निकलकर ऊपरी हिस्सों में आ गई, जिससे किसानों की सैकड़ों बीघा गेहूं और सरसों की फसल पानी में डूबकर खराब हो रही है।
किसानों ने बताया कि अगर जलस्तर और बढ़ता है, तो किनारे पर शेष बची फसलें भी डूब जाएंगी।
नदी के किनारे चकरनगर, डिभोली, रनियां, ककरैया, खिरीटी, गौहानी, हरौली भरेह, चकरपुरा आदि के रामकुमार पांडे, पप्पू पांडे, राम प्रसाद, बेटी चौहान, पिंकू ठाकुर, सुरेंद्र तिवारी, राजेंद्र निषाद, अर्जुन निषाद आदि ने बताया कि दशकों बाद सर्दी के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ा है।
यह जमीन राजस्व अभिलेखों में किसी के नाम नहीं होती। इस वर्ष सभी फसलें डूब गई हैं। पिछले हफ्ते से खेतों में पानी भरा है, जिससे फसलें चौपट हो गई।