इटावा। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के एक आदेश ने केके स्नातकोत्तर महाविद्यालय के 225 छात्र-छात्राओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है। एक ही मामले में आधे विद्यार्थियों को पास और आधे को फेल कर देने वाले इस आदेश से छात्र-छात्राओं में काफी रोष है।
सोमवार को परेशान छात्र-छात्राओं ने सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र प्रसाद को ज्ञापन देकर परीक्षाफल घोषित करने की मांग की है। मामला केके स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 16 जुलाई को द्वितीय पाली की परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल से जुड़ा है। इस दिन एलएलबी तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा हो रही थी।
विवि प्रशासन को सीसीटीवी कैमरों से हो रही वेब कास्टिंग के जरिए एलएलबी के परीक्षा कक्ष में सामूहिक नकल होने जैसी हरकतें दिखाई दी। विवि के परीक्षा नियंत्रक से लेकर कुलपति तक ने केके महाविद्यालय प्रशासन से इस बाबत जानकारी करनी चाही, परंतु तत्कालीन प्राचार्य से लेकर परीक्षा कार्य से जुड़े सभी लोगों ने कोई गौर नहीं किया।
मजबूरन कुलपति ने डीएम को फोन करके जानकारी दी। इसके बाद महाविद्यालय में डीआईओएस ने पुलिस बल के साथ छापा मारा। सामूहिक नकल की रिपोर्ट शासन को भेजी गई। कुलपति ने तत्कालीन प्राचार्य के खिलाफ नकल अधिनियम की रिपोर्ट दर्ज कराई।
16 जुलाई को एलएलबी तृतीय सेमेस्टर के 246 छात्र-छात्राएं और बीएससी तृृतीय वर्ष के रसायन विज्ञान के 88, बीए तृतीय वर्ष हिंदी साहित्य के 137 छात्र छात्राओं ने परीक्षा दी थी। विवि ने एलएलबी और बाकी दोनों स्नातक पाठ्यक्रमों का परीक्षाफल घोषित कर दिया।
23 सितंबर को बीए और बीएससी तृतीय वर्ष का परीक्षाफल घोषित हुआ। अचानक 9 अक्तूबर को विवि ने घोषित परीक्षाफल को वापस लेते हुए 225 छात्र-छात्राओं का परीक्षाफल यूएफएम श्रेणी में डाल दिया, जबकि एलएलबी के परीक्षाफल के साथ ऐसा नहीं किया गया।
छात्र-छात्राओं ने बताया कि हम लोगों ने पूर्व में प्रदर्शित परीक्षाफल के आधार पर अगली कक्षा में प्रवेश ले लिया था। अब वे कहीं के नहीं रहे। उनका भविष्य ही चौपट हो रहा है।
छात्रों के पास इंटरनेट से निकाली गई पास की मार्कशीट भी है। इसी आधार पर प्रवेश भी आगे की कक्षा में लिया है।
छात्र पवन चौधरी, अंकित वर्मा, हिमांशु प्रताप सिंह, नेहा, निशा, पूजा यादव, बबिता, काजल, अंजली, तान्या वर्मा एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पवन दुबे छात्र-छात्राओं के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे और सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन देकर छात्र-छात्राओं के भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए परीक्षाफल घोषित कराने की मांग की।