पछांयगांव थाना क्षेत्र के ग्राम बहादुरपुर में खनन माफिया और उनके साथियों द्वारा वन विभाग की टीम पर हमले के बाद अब छापेमारी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। वन विभाग की टीम में शामिल पांच में से तीन अधिकारियों के बिना वर्दी के होने और बगैर उच्चाधिकारियाें को सूचना दिए मौके पर जाना कहीं न कहीं छापामार कार्रवाई पर सवाल उठाता है। वन विभाग के अधिकारी इस मामले में पुलिस पर दोष मढ़ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश शासन के दिनांक 28 अक्टूबर 1976 को जारी आदेश में वन रेंजर एवं डिप्टी वन रेंजर की ड्रेस निर्धारित करने की व्यवस्था की गई है। 25-02-1997 एवं 26-06-2002 के शासनादेशों में वन अधिकारियों को ड्रेस एवं स्टार लगाने की व्यवस्था की गई है। 10-04-2013 को जारी शासनादेश में ये स्पष्ट किया गया है कि विभागीय अधिकारी ड्यूटी के समय वर्दी पहनना सुनिश्चित करें। इसके लिए निरीक्षण अधिकारी नियुक्त किए जाएं। वह समय-समय पर ये देखेंगे कि वर्दी का प्रयोग हो रहा है अथवा नहीं। वन अधिकारियों को इसके लिए वर्दी भत्ता और धुलाई का पैसा भी मिलता है।
इसके बावजूद वन रेंजर अमित कुमार, विवेक एवं वन दरोगा सत्यप्रकाश बिना वर्दी के ही छापामार कार्रवाई करने बहादुरपुर पहुंचे। दो वनरक्षक राजेश एवं ब्रजमोहन ही वर्दी में थे। रात ढाई बजे बिना वर्दी के छापामार कार्रवाई पर निकलना खतरे से भरा रहा। ग्रामीणों ने भी वन विभाग की टीम को भैंस चोर गिरोह का सदस्य मानकर लाठी डंडों से हमला कर दिया। वन कर्मचारियों को जान के लाले पड़ गए। यदि सभी वर्दी में होते तो शायद ग्रामीणों को इतनी जल्दी गलतफहमी नहीं होती।
इटावा और आगरा की सीमा से सटे गांव पुरा मुरोंग के दक्षिणी छोर पर चंबल नदी बहती है। ये सेंचुरी क्षेत्र है। घने जंगल से होकर चंबल तक आसानी से पहुंचने का सीधा रास्ता भी नहीं है। खनन माफिया की नजर इस क्षेत्र में पड़ी। हमला गुरुवार रात हुआ। उससे तीन चार दिन पहले ही यहां से खनन शुरू हुआ। चंबल तक ट्रैक्टर से पहुंचने का रास्ता भी नहीं था। खनन माफियाओं ने ही रास्ता तैयार कराया। गुुरुवार को इसकी जानकारी वन विभाग सेेंचुरी को हुई। रेंजर अमित और विवेक तीन सहयोगियों के साथ पुरा मुरोंग पहुंचे। रात ढाई बजे जैसे ही मौरंग लदे ट्रैक्टर पुरा मुरोंग होकर निकले, टीम ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। ट्रैक्टर बहादुरपुर की ओर दौड़े। पीछे सादी वर्दी में गाड़ी से वन विभाग की टीम थी। रास्ता ऐसा था कि गाड़ी आगे नहीं निकल सकी और हमलावरों का शिकार हो गई।
- ट्रैक्टर पकड़ने गई टीम पर खनन माफिया ने किया था हमला