अमर उजाला ब्यूरो
इटावा। भरथना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के इमरजेंसी वार्ड के बाहर दुर्घटना में घायल व उसके परिजन दो घंटे तक चीखते रहे, लेकिन दरवाजा नहीं खुले। बाद में परिजनों ने घायल का इलाज प्राइवेट अस्पताल में कराया है। इधर, सीएचसी अधीक्षक ने दरवाजा न खोलने की बात से इनकार किया है। उसका दावा है कि रात में इमरजेंसी स्टाफ मौजूद था, कोई भी मरीज नहीं आया है।
ऊसराहार थाना क्षेत्र के ग्राम वैदपुरा निवासी सतेंद्र सिंह पुत्र हरिश्चंद्र शनिवार रात्रि स्कूटी से गांव जा रहा था। भरथना में एसएवी इंटर कॉलेज के निकट सड़क हादसे में वह घायल होकर बेहोश हो गया। होश आने पर फोन से उसने परिजनों को घटना की जानकारी दी। जानकारी मिलते ही उसके परिजन घटनास्थल पर पहुंचे और घायल को नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले गए।
परिजन इमरजेंसी वार्ड के दरवाजे पर दो घंटे तक चीखते चिल्लाते रहे, लेकिन किसी भी डॉक्टर ने उनकी सुध नहीं ली। उसने रात्रि में ही जिले के उच्चाधिकारियों को इस संबंध में फोन पर जानकारी दी।
वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डा. अमित दीक्षित का कहना था कि रात्रि के समय में मरीज से संबंधित किसी का फोन नहीं आया था। दरवाजा न खोलने की बात बिल्कुल झूठ है क्योंकि दरवाजे में ताला डालने का कोई स्थान नहीं है। रात्रि के समय इमरजेंसी में डॉक्टर, फार्मासिस्ट तथा वार्ड बाय तीनों ही ड्यूटी पर तैनात थे। जो लोग दो घंटे तक स्वास्थ्य केंद्र में रुकने की बात कह रहे हैं वह झूठ है।
- सीएचसी की इमरजेंसी वार्ड का दरवाजा डाक्टरों ने नहीं खोला
- सीएचसी अधीक्षक ने कहा कोई मरीज नहीं आया