इटावा। महेवा कस्बा स्थित पशु अस्पताल की खाली पड़ी भूमि पर बाउंड्रीवाल न होने के चलते भू माफिया कब्जा का प्रयास कर रहे हैं। इससे सरकारी जमीन का दायरा घटता जा रहा है।
महेवा का पशु अस्पताल का निर्माण क्षेत्रीय जमींदार व महेवा के संस्थापक चौबे गुरुनारायण राव के प्रयासों से सन 1910 में कराया गया था। तब पूरे प्रदेश में इक्का दुक्का ही पशु अस्पताल थे। इसके बाद चौबे जी ने 1912 में महेवा में रामजानकी मंदिर का निर्माण कराया था उसी वजह से महेवा का नाम मंदिर महेवा पड़ा। अब पुरानी इमारत की जगह अस्पताल की इमारत तो नई बन गई पर बाउंड्रीवाल का निर्माण न होने के चलते चारों ओर से लोगों ने इसकी जगह पर कब्जा करना, दरवाजे रखना तथा स्थायी निर्माण करना भी शुरू कर दिए हैं।
गत वर्ष तत्कालीन उपजिलाधिकारी भरथना राजमणि मिश्र ने जन शिकायत पर आकर अस्पताल की जगह में भरी नींव को तुड़वाया था। वहीं पिछले वर्ष जून में अस्पताल का भ्रमण करने आए पशुधन मंत्री एसपी सिंह बघेल ने लोगों की शिकायत पर क्षेत्रीय लेखपाल को मौके पर बुलाकर नाप तोल कर रिपोर्ट देने व चिकित्सा प्रभारी से बाउंड्रीवाल का प्रस्ताव बनाकर जिला पशु चिकत्सा अधिकारी के माध्यम से भेजने का निर्देश दिया था। इन निर्देशों के एक वर्ष बाद भी बाउंड्रीवाल का निर्माण न होने से भू माफिया के हौसले बुलंद हैं।
उन्होंने अस्थायी निर्माण करना फिर शुरू कर दिया। इतना ही नहीं अस्पताल के मुख्य गेट के पास तो लोहपीटा वर्ग के लोग झोपड़ी बनाकर रहने लगे हैं। समाज सेवी विनोद बाबू पोरवाल, युवा भाजपा नेता सोनू अग्निहोत्री ने जिलाधिकारी इटावा से अस्पताल की बाउंड्री बाल बनवाने की मांग की है ।
इस संबंध में जब पशु चिकित्सा अधिकारी महेवा डा. शरद यादव से बात की तो उन्होंने बताया कि प्रस्ताव जा चुका है। हो सकता है कि चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने के बाद कार्य प्रारंभ हो। कब्जेदारों की सूचना राजस्व विभाग को दे दी गई है। वहीं इस संबंध में उपजिलाधिकारी भरथना एनपी मौर्या ने बताया कि वह कानूनगो व क्षेत्रीय लेखपाल से वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट लेकर नापजोख कराकर सीमांकन कराएंगे। किसी भी दशा में कोई कब्जा नहीं होने दिया जाएगा।