सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। प्रतिदिन चार सौ मरीज स्वास्थ्य सेवा का लाभ लेने पहुंचते हैं, लेकिन यहां पर न तो चिकित्सक हैं और न ही पैरा मेडिकल स्टाफ। एक्सरे मशीन सात वर्षों से धूल फांक रहीं है। इस कारण मरीजों को बाहर से एक्सरे कराने को बाहर से जाना पड़ रहा है। क्षेत्रीय लोगों ने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के हालात बदतर हैं। लोगों को बेहतर इलाज के अभाव में निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग है कि इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। अस्पताल में महज दो डाक्टर ही काम कर रहे हैं। जबकि आठ पद खाली हैं। दोनों चिकित्सक ही ओपीडी और आपातकालीन सेवा देख रहे हैं। सिर्फ तीन नर्स हैं। जननी सुरक्षा योजना भी भगवान भरोसे हैं।
महिला चिकित्सक संविदा पर कार्यरत हैं जो सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे रहती हैं। इसके बाद नर्स और एएनएम ही महिलाओं के इलाज एवं प्रसव कराती हैं। में एएनएम के 26 पद है, लेकिन 13 एएनएम हैं।
एक्सरे मशीन के टेक्नीशियन न होने सात सालों से बंद पड़ी है। बाल रोग व हड्डी रोग विषेशज्ञ न होने के कारण लोगों को बाहर महंगे इलाज कराने को विवश होना पड़ रहा है। सर्जन न होने के कारण ओटी सालों से बंद पड़ी है। आपातकालीन समय में स्वास्थ्य सेवाएं नहीं है। सफाई व्यवस्था बदहाल है। पानी की मशीन वर्षों से खराब हैं।