एटा। खेती में रसायनों के बेहिसाब इस्तेमाल से माटी की तासीर ठंडी पड़ती जा रही है। मिट्टी के लिए जरूरी पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म तत्व (माइक्रोन्यूट्रेंट्स) का अनुपात गड़बड़ा गया है। जिससे मिट्टी की सेहत लगातार गिरती जा रही है। अधिक रासायनिक खाद का प्रयोग कर किसान भले ही उत्पादन ज्यादा प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन यह मिट्टी के साथ ही मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक बन गया है।
मृदा विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि किसान अधिक रासायनिक खाद व डीएपी लगाने के चक्कर में अपने खेत की मिट्टी के पोषक तत्वों को खत्म कर रहे हैं। इससे उत्पादकता कम होती जाती है। जिसे बढ़ाने के लिए किसान अधिक रसायनों का प्रयोग करते हैं। इन रसायनों के प्रयोग से मिलने वाला अनाज, सब्जी आदि तमाम बीमारियों की वजह बन रहे हैं।
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पोषक तत्व मानक उपलब्धता
ऑर्गेनिक कार्बन 0.8 - 0.3 से 0.4
फॉस्फोरस 40 किग्रा प्रति हेक्टेयर -9 से 15 किग्रा प्रति हेक्टेयर
पोटेशियम 250 किग्रा प्रति हेक्टेयर-140 से 180 प्रति हेक्टेयर
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दो साल से बंद पड़ी है
किसानों के लिए बड़ी समस्या यह है कि जिले में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला दो साल से बंद पड़ी हुई है। इसकी वजह से वह अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण नहीं करा पा रहे हैं। अगर मृदा परीक्षण शुरू हो जाए तो किसान इसके प्रति जागरूक हो सकें।
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रासायनिक खाद व डीएपी न लगाने पर उपज बहुत कम मिलती है। इसलिए डीएपी व रासायनिक खाद लगानी पड़ती है।
- विकास, शीतलपुर
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खेत की मिट्टी का परीक्षण एक बार भी नहीं कराया है। न तो इसकी जरूरत पड़ी और न ही इसके फायदे-नुकसान पता हैं।
- घमंडी, सकीट
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मृदा परीक्षण के लिए दो साल से शासन की ओर से बजट नहीं मिला है। जिसकी वजह से मृदा परीक्षण नहीं हो पा रहा है। किसानों को जैविक खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है।
- एमपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी