एटा। नवरात्र के छठवें दिन भक्तजनों ने मां कात्यायनी देवी की पूजा-अर्चना कर मुरादें मांगीं। पूजा करने के लिए सुबह से ही मंदिरों में भीड़ जुटने लगी। शहर के जीटी रोड स्थित जनता दुर्गा मंदिर, ठंडी सड़क स्थित पथवारी मंदिर के साथ ही अन्य देवी मंदिरों में भी भीड़ नजर आई।
जनता दुर्गा मंदिर के पुजारी चंद्रप्रकाश गुप्ता उर्फ गांधी ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार महर्षि कात्यायन ने भगवती परांबा की उपासना कर बहुत वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी कि मां भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। मां ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली। कुछ काल के बाद जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बहुत अधिक बढ़ गया था। तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने अपने-अपने तेज का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को प्रकट किया। महर्षि कात्यायन ने सर्वप्रथम इनकी पूजा की और देवी इनकी पुत्री कात्यायनी कहलाईं।
बताया कि भगवान कृष्ण को पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्ही की पूजा कालिंदी नदी के तट पर की थी। ये ब्रज मंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह का संबंध इनसे माना जाता है। मां को शहद बहुत प्रिय है, इसलिए इस दिन मां को भोग में शहद अर्पित किया जाता है। इसके साथ ही देवी दुर्गा को लाल रंग अतिप्रिय है, लेकिन विशेष रूप से देवी कात्यायनी का प्रिय रंग भी लाल ही है। इस वजह से पूजा में मां कात्यायनी को लाल रंग के गुलाब का फूल अर्पित कर प्रसन्न किया जाता है।