शहर में दिन भर लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने एक बार फिर तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्राइवेट बस स्टैंड बाहर करने, ई रिक्शाओं का नगरपालिका में रजिस्ट्रेशन कराने, अतिक्रमण से लोगों को निजात दिलाने के लिए एक टीम भी गठित की है। वर्ष 2012 से प्रशासन लगातार प्राइवेट बस स्टैंड को बाहर करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन प्रयास असफल साबित हुआ है।
सोमवार को कलक्ट्रेट सभागार में जाम की समस्या से निपटने के लिए पुलिस- प्रशासनिक अधिकारियों की एक बैठक हुई। इसमें एडीएम प्रशासन लालमणि मिश्र एडीएम वित्त और राजस्व राजेंद्र कुमार, एसडीएम सदर अजीत कुमार सिंह, एएसपी क्राइम आरपी गुप्ता, सीओ सिटी करन सिंह, एआरएम संजीव यादव, टीएसआई मौजूद थे। बैठक में प्राइवेट बस स्टैंड को शहर से बाहर करने पर चर्चा हुई। वहीं, ई रिक्शा चालकों को नगर पालिका से लाइसेंस लेना होगा। इसके अलावा बिना परमिट के दौड़ रहे डग्गामार वाहन, प्राइवेट बस पर कार्रवाई करने की भी रणनीति बनाई।
एटा कासगंज रोड पर बिना परमिट के कई बस दौड़ रही हैं। लोगों को इन समस्याओं से निजात दिलाने के लिए एसडीएम, सीओ, एआरएम, एआरटीओ व टीएसआई की एक टीम भी बनाई गई है। जीटी रोड पर जाम की समस्या अब आम बात हो गई है। ई-रिक्शा चालक भी मनमाने ढंग से इनका संचालन करते हैं, जोकि जाम को बढ़ावा देता है। सोमवार को भी यही हाल जीटी रोड पर देखने को मिला।
नहीं बाहर हो पाए प्राइवेट बस स्टैंड
जिला प्रशासन की ओर से प्राइवेट बस स्टैंड को शहर से बाहर करने की कई बार कोशिश की गई, लेकिन नाकाम रही। वर्ष 2012 में तत्कालीन डीएम ने प्राइवेट बस स्टैंड को शहर से बाहर करने के निर्देश दिए थे। लेकिन प्राइवेट बस यूनियन की मनमानी के चलते हाथ पीछे कर लिए।