एटा। फरवरी की शुरूआत में एक बार फिर मौसम में बदलाव हुआ। सोमवार रात के बाद मंगलवार सुबह और दोपहर के समय रिमझिम वर्षा हुई। अधिकांश समय बादल छाए रहे। सुबह से चली ठंडी हवाओं ने ठंड का अहसास कराया। इस बूंदाबांदी को फसलों के लिए लाभदायक बताया जा रहा है लेकिन अधिक बरसात होती है तो ये नुकसान का रूप ले सकती है।
कई दिनों से तेज धूप निकलने से लोगों को गर्मी जैसा अहसास होने लगा था। लोग कहते नजर आ रहे थे कि सर्दी विदा हो गई है, लेकिन सोमवार रात अचानक मौसम में बदलाव देखने को मिला। हल्की बूंदाबांदी के साथ ठंडी हवाएं चली तो तापमान एकदम से नीचे आया। रात के बाद मंगलवार सुबह भी बादल छाए रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह ही बूंदाबांदी हो गई। दोपहर के समय सूर्य नजर आया और हल्की धूप खिली। जबकि दोपहर बाद करीब 3 बजे फिर बादल घिर आए और शहर सहित कस्बों व ग्रामीण क्षेत्रों में बूंदाबांदी शुरू हो गई।
26 जनवरी के बाद से ही मौसम दिन में गर्माहट भरा रहने लगा था। तेज धूप से किसान चिंतित नजर आने लगे थे। फरवरी माह के शुरुआती सप्ताह में हुई बारिश ने किसानों को चिंता से निजात दिलाई। उनका कहना है कि गेहूं सहित अन्य फसलों के लिए भी हल्की वर्षा फायदेमंद है। लेकिन तेज बारिश होती है या तेज हवा चलती है तो सरसों, आलू, तंबाकू में नुकसान हो सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक एसके सिंह ने बताया कि मौसम परिवर्तन से फसलों को फायदा होगा। पिछले कुछ दिनों से अचानक गर्म मौसम फसलों के लिए चिंताजनक था। मंगलवार को हुई बूंदाबांदी किसानों की चिंता को दूर करेगी। अगर तेज बारिश के साथ ओले पड़ते हैं तो सरसों को फसल को नुकसान हो सकता है। अगले तीन-चार दिन आसमान में कम-ज्यादा बादल देखने को मिलेंगे। हालांकि, वर्षा का अनुमान नहीं है।
बाजार में रहा सन्नाटा
सकीट। मौसम खराब होने की वजह से ग्राहक नदारद रहे और अधिकांश समय बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। व्यापारी हाथ पर हाथ रखे ग्राहकों का इंतजार करते दिखाई दिए। किसानों को यह चिंता है कि यदि बरसात ज्यादा हुई तो सरसों, आलू व मटर की फसल में नुकसान हो सकता है। संवाद
बूंदाबांदी से चिंतित हुए ईंट भट्ठा संचालक
जैथरा। कस्बे में मंगलवार सुबह हुई हल्की बूंदाबांदी के बाद किसान खुशी मना रहे थे। जबकि ईंट भट्ठों के संचालक चिंताओं में घिरे नजर आए। भट्ठा कर्मचारी किसनलाल वर्मा, कलेक्टर सिंह राठौर आदि ने बताया भट्ठाें पर इस समय खुले आसमान के नीचे लाखों कच्ची ईंटें रखी हुए हैं। यदि तेज बारिश हुई तो ये खराब हो जाएंगी। ईंट की पथाई का काम इस समय तेजी पर चल रहा है। संवाद