मारहरा। कस्बे की विश्वप्रसिद्ध खानकाहे बरकातिया में तीन दिवसीय 120वां उर्स-ए-नूरी अकीदत और धूमधाम के साथ शनिवार को शुरू हो गया।
कुरानखानी और तिलावत-ए-कुरान से शुरू हुए इस आयोजन में हजारों जायरीन ने शिरकत की। देशभर से आए श्रद्धालुओं ने खानकाह की परंपरा और शिक्षा के संदेश को आत्मसात किया।
सज्जादा नशीन सैयद नजीब हैदर नूरी ने अपनी मशहूर पंक्ति, खो के सुध-बुध बनी सनीचर पीर हक्का जन्मा है अहमद नूरी पढ़ी। उन्होंने शिक्षा, नमाज और शरीयत पर चलने का संदेश दिया।
मौलाना इरफान अजहरी, मौलाना असलम नबील, मौलाना शामी बरकाती सहित अन्य लोगों ने भी संदेश दिए। शाम 4 बजे दरगाह खानकाह ए बरकातिया से चादर-गागर का जुलूस निकाला गया। पालिकाध्यक्ष शशिप्रभा ने बताया कि सफाई कर्मचारियों की अतिरिक्त टीमें लगाई हैं। ताकि जायरीनों को आवागमन में समस्या न हो।
हत्या के बाद जला रहे थे महिला की लाश
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