एटा। परिवहन निगम पहले से ही सवारियों को लेकर जूझता आ रहा है। इसके साथ ही निजी बस संचालक अवैध रूप से बसें चलवाकर राजस्व को लाखों रुपये महीने की क्षति पहुंचा रहे हैं। कस्बा मारहरा से हर रोज 4 निजी बसों का दिल्ली के लिए संचालन हो रहा है। इसकी वजह से परिवहन निगम की बसों को सवारियां नहीं मिल पा रहीं हैं।
कस्बा मारहरा से 4 निजी बसें प्रतिदिन सुबह दिल्ली के लिए जाती हैं। संचालकों ने बसों का समय निर्धारित कर दिया है। पहली बस सुबह 5 बजे दिल्ली के लिए 60 सवारियां लेकर निकलती हैं। इसके बाद एक घंटे के अंतराल से बसें दिल्ली के लिए रवाना होती हैं। अंतिम बस का समय 7:30 बजे रखा गया है। निजी बसें कस्बा मिरहची से भी सवारियां उठाती हैं और कस्बा मारहरा स्थित मिरहची अड्डा पर खड़ी होने के बाद अस्पताल चौराहे और हैदरी चौक पर खड़ी होकर सवारियां उठाकर मोहनपुरा होते हुए दिल्ली के लिए निकल जाती हैं।
परिवहन निगम की बसें सुबह 9 और 10:30 बजे कस्बा मारहरा पहुंची हैं, तब तक निजी बस संचालक सवारियों को लेकर चले जाते हैं। इसकी वजह से निगम की बसें खाली चल रहीं हैं और निजी बस संचालक निगम को लाखों का चूना लगा रहे हैं। बसें बिना परमिट के चलाए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है। एआरएम राजेश यादव ने बताया कि कस्बा मारहरा से 4 बसों के संचालन होने की जानकारी मिली है। परिवहन विभाग की ओर से कार्रवाई के लिए पत्राचार किया जाएगा। निगम की बसों को सवारियां नहीं मिल रही है, ऐसे में राजस्व घाटा हो रहा है।
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महीने में 43 लाख रुपये का राजस्व का घाटा
परिवहन निगम की बसों को प्रति माह 43 लाख रुपये का घाटा कस्बा मारहरा से हो रहा है। यहां से चलने वाली प्रत्येक बस में करीब 60 सवारियां जाती हैं और कौशांबी का किराया 300 रुपये के करीब है। एक बस दोनों ओर से 36 हजार रुपये की सवारियां ले जाती है, 4 बसें 1.44 लाख रुपये की प्रतिदिन सवारियाें से किराया वसूलते हैं, जो एक महीने में 43.20 लाख के करीब किराया वसूल कर निगम को राजस्व की हानि पहुंचा रहे हैं।