बुझ गए घरों के इकलौते चिराग
आशीष और विपिन की मौत के बाद पोस्टमार्टम हाउस पर शवों को देखने अलीगंज और उसके आसपास के तमाम लोग आए। लोगों का कहना था कि दोनों अपने घरों के इकलौते पुत्र थे। विपिन के तहरे भाई सुभाष चंद्र ने बताया कि दोनों बचपन के दोस्त थे। दोनों के पिता की मृत्यु हो चुकी है। विपिन की एक और आशीष की छह बहनें हैं। सभी की शादियां हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों की मौत से दोनों घरों के चिराग बुझ गए हैं। पिता की मौत के बाद दोनों अपनी-अपनीं मां का इकलौता सहारा थे।
भाई कहां से लाऊंगी, किसकी करूंगी दूज
सड़क हादसे में भाई आशीष की मौत की सूचना पर मोर्चरी पहुंची बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। सभी बहने यहीं कह रही थीं कि मेरा एक ही भाई था वो भी भगवान तुमने छीन लिया। तुम ही बताओ कि अब मैं किसकी दूज करूंगी, भाई कहां से लाऊंगी।
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