17 दिन पूर्व सुन्नगढ़ी इलाके की खादर में जमीन पर कब्जे को लेकर किसौल और किलौनी के दो पक्षों के बीच हुए खूनी संघर्ष में पांच जाने चली गईं। अभी तक ग्रामीणों की शिकायतों का कोई समाधान नहीं निकल सका है। पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है। आम आदमी पार्टी ने किसौल गांव के ग्रामीणों की मांग उठाते हुए पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर पहुंचकर जमीन पर कब्जों के खेल और खूनी खेल के बारे में कई जानकारियां देते हुए कार्रवाई की मांग उठाई।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे किसौल के ग्रामीणों ने सौंपे पत्र में कहा कि किलौनी व अन्य गांव के दबंगों ने उनकी जमीन पर कब्जे कर लिए हैं। तीन माह पूर्व मामले की शिकायत भी की गई। राजस्व टीम ने गांव का रकवा भी अलग कर दिया लेकिन कुछ लोग लगातार भूमि पर कब्जा करने को हावी रहे। जिसके चलते खूनी संघर्ष हो गया। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन का भय खत्म किया जाए जिससे लोग खेतीबाड़ी कर सकें।
ग्रामीणों ने मांग की कि किसौल के मृतक रामरहीस एवं अमृतपाल की पत्नियों को मुकदमे का वादी बनाया जाए। जिससे न्याय पाने में दिक्कत न हो। इस मामले के मास्टरमाइंड बब्बल पुत्र रोहतास को मुख्य आरोपियों में शामिल करते हुए गिरफ्तारी की मांग की। इस मामले में कई अन्य लोगों के नाम का खुलासा करते हुए उनके खिलाफ भी पुलिस कार्रवाई की मांग की। इस दौरान सशील सिंह, अवनीश, लीलाधर, जब्बार, रामदास, लालाराम, सुल्तान, बलवीर, वकील, मुन्नालाल, नत्थू, जसवीर, राजेंद्र सहित तमाम लोग मौजूद रहे।