राज्यकर्मियों की दो दिवसीय कलमबंद हड़ताल मंगलवार से शुरू हो गई। कर्मियों ने कलक्ट्रेट पर धरना देकर अपनी समस्या रखी और समाधान की मांग उठाई। कर्मियों की हड़ताल का विभागीय काम काज पर भी असर देखा गया।
इंजीनियर गोविंद सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार कर्मियों की उपेक्षा कर रही है। सरकार हठधर्मिता की नीति अपना रही है। सरकार को कर्मियों की परेशानी से कोई सरोकार नहीं हैं। कर्मी नेता केपी सिंह ने कहा कि वर्ष 2013 में संग्रह अमीनों को नायब तहसीलदार के पद पर पदोन्नत करने का समझौता सरकार से हुआ था, लेकिन सरकार ने दो साल बीत जाने के बाद भी इस संबंध में शासनादेश जारी नहीं किया।
ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के जिला अध्यक्ष आरडी यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार कर्मचारी विरोधी मानसिकता पर कार्य कर रही है। इंजीनियर कालू राम ने कहा कि सरकार पुरानी पेंशन व्यवस्था को फिर से बहाल करे। परिषद के जिला अध्यक्ष राजकुमार सिंह ने कहा कि सरकार अपनी मानसिकता को बदले। कर्मचारियों का अहित बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हड़ताल में विभिन्न विभागों के कर्मियों के शामिल रहने से कामकाज पर काफी असर देखा गया। धरने की अध्यक्षता रोशन शास्त्री ने की। इस दौरान रमेश चंद्र, भगवान सिंह, दिनेश सविता, रहीश पाल सिंह, गिरंद सिंह, एवन सिंह, ज्ञान सिंह, आशोक कुमार, मुकेश कुमार, सियाराम, जावेद खान, राजवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
स्वास्थ्यकर्मियों का दो घंटे कार्य बहिष्कार
राज्यकर्मियों की हड़ताल के समर्थन में स्वास्थ्य विभाग के कर्मी भी आ गए। कर्मियों ने दो घंटे तक कार्य बहिष्कार किया। अस्पताल गेट पर प्रदर्शन कर अपनी मांग रखीं। कर्मियों ने सातवें वेतन आयोग का विरोध किया। कर्मियों के कार्य बहिष्कार से स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर देखा गया। इस दौरान सत्य प्रकाश, संजीव कुमार, तोता राम, बांकेलाल, प्रमोद आदि मौजूद रहे।