मंदिर महंत विदेहानंद गिरि के शाही स्नान के बाद हजारों श्रद्धालुओं ने हरिपदी के पवित्र जल में गंगा स्नान किया।
मान्यता है कि मार्गशीर्ष एकादशी को भगवान वराह ने पृथ्वी पर अवतरित होकर राक्षस हिरण्याक्ष का वध किया। इसके बाद मार्गशीर्ष द्वादशी को अपने शरीर का हरिपदी में त्याग कर दिया था। भगवान वराह के इस मोक्ष दिवस पर गंगा स्नान का पौराणिक महत्व बताया गया है। वराह मंदिर में हवन के बाद भगवान वराह लक्ष्मी का भव्य श्रंगार किया गया। महाआरती उतारकर प्रसाद बांटा गया। महंत ने श्रद्धालुओं को खजाना लुटाया।
मान्यता है कि खजाने में मिला सिक्का घर में रखने से धन की वृद्धि होती है। मंदिर को सजाकर भव्य रूप दिया। नगरपालिका ने रात्रि में मेला पर्यंत मंदिर को सतरंगी रोशनी से सजाने का प्रबंध किया गया है। शाम के समय भगवान वराह की भव्य शोभायात्रा संपूर्ण नगर में गाजेबाजे के साथ निकाली गई। सबसे आगे भगवान वराह की दिव्य प्रतिमा से सजा रथ साथ में बैठे महंत थे। जगह जगह श्रद्धालु रथ पर पुष्पवर्षा कर भगवान वराह की आरती उतारी। रथ के आगे श्रद्धालु रामनामी दुपट्टा धारण कर भगवान वराह की जयजयकार करते चल रहे थे।
शोभायात्रा वराह मंदिर से शुरू होकर चक्रतीर्थ, कटरा बाजार, चंदनचौक, मेला रोड, हरिपदी, बदरिया आदि बाजारों में भ्रमण किया। इस अवसर पर सुनील तिवारी, अनुभव चौधरी, सुधांशु निर्भय, पंकज महेरे, विवेक दीक्षित, शिवेंद्र समाधिया, श्रीकांत तिवारी आदि मौजूद रहे।
शाही स्नान आज
मार्गशीर्ष त्रयोदशी के अवसर पर बुधवार को नागा साधुओं की भव्य शोभायात्रा सुबह 11 बजे से हरिपदी किनारे नागालैंड से शुरू होगी। साधु संत हरिपदी में शाही स्नान करेंगे।