एटा। मरथरा गांव में शनिवार सुबह करीब आठ बजे बंदर के झपटने से बचने के दौरान छत से गिरकर एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे परिजन उपचार के लिए वीरांगना अवंतीबाई मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। परिजन का आरोप है कि मरीज इलाज के लिए एक से डेढ़ घंटे तक तड़पता रहा, लेकिन स्वास्थ्यकर्मी बड़े डॉक्टर साहब के आने की बात कहकर टरकाते रहे। अंत में इलाज में देरी के कारण युवक की जान चली गई।
कोतवाली देहात के गांव मरथरा निवासी आरिफ ने बताया कि भाई हबीब छत पर सो रहे थे। इसी दौरान अचानक एक बंदर ने उन पर झपट्टा मार दिया। बंदर से बचने की कोशिश में वह दो मंजिला छत से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। आरिफ का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के समय भाई बातचीत कर रहे थे। रह-रहकर दर्द से निजात पाने के लिए जल्द इलाज की गुहार लगा रहे थे।
इमरजेंसी वार्ड में करीब एक से घंटे तक उन्हें इलाज नहीं मिला। परिजन के बार-बार कहने पर स्वास्थकर्मियों ने कहा कि बड़े डॉक्टर साहब आकर देखेंगे। आरोप है कि इसी इंतजार में समय बीतता गया और हबीब की हालत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद डॉक्टर उन्हें आईसीयू ले जाने लगे, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। आरिफ ने समय पर उपचार न मिलने को मौत का कारण बताया।
पांच बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
तहेरे भाई आरिफ ने बताया कि घायल हबीब अस्पताल में बच्चों और पत्नी से बातचीत कर रहे थे। वह तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे और उनके पांच बच्चे, जिनमें दो बेटे और तीन बेटियां हैं। उनकी मौत के बाद बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। सबसे छोटी बेटी पांच वर्ष की है और सबसे बड़ा बेटा 16 साल का है।
परिवार की ओर से लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। मरीज को भर्ती कर उसका उपचार किया गया और उसे आईसीयू में भर्ती किया गया। अधिक रक्तश्राव होने और सांस फूलने के कारण उसकी मौत हो गई। चिकित्सकों की ओर से कोई लापरवाही नहीं बरती गई। - डॉ. बलवीर सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज