एटा। निर्धारित ग्रेड से अधिक वेतन निकालने के मामले में जहां फार्मासिस्ट हाईकोर्ट में चले गए हैं। वहीं, तत्कालीन बाबुओं (लेखा लिपिकों) की भूमिका पर भी गलत वेतन निर्धारण को लेकर संदेह खड़ा हो गया है। इसके अलावा अन्य फार्मासिस्ट की सेवा पुस्तिकाओं की भी जांच कराई जाएगी।
2015 में नियुक्ति के बाद आए फार्मासिस्टों के मामले में ऐसा हुआ। बताया गया है कि दो साल बाद जो वेतन वृद्धि लगनी थी, इनके मामले में पहले ही लगाकर अधिक वेतनमान दे दिया गया। पिछले साल हुए विभागीय ऑडिट में मामला पकड़ में आया था। ऑडिट आपत्ति में इस धनराशि के समायोजन के निर्देश दिए गए।
इस रिपोर्ट के आधार पर अप्रैल में सीएमओ ने इन सभी फार्मासिस्ट को रिकवरी का आदेश जारी कर दिया। फार्मासिस्ट इसके विरोध में हाईकोर्ट चले गए। अदालत ने रिकवरी पर स्थगन आदेश देते हुए मामले में सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की है। फार्मासिस्टों का यह भी कहना है कि वेतन निर्धारण और आहरण की प्रक्रिया संबंधित बाबुओं के द्वारा की जाती है। ऐसे में गलती तो उनके स्तर से हुई।