जैथरा। कस्बे के जनसेवा केंद्र पर लेखपाल की रिश्वतखोरी का वीडियो और स्क्रीन शॉट वायरल होने के बाद केंद्र संचालकों व राजस्व महकमे में खलबली मच गई है। रिश्वतखोरी का अड्डा बने केंद्र का संचालक दुकान पर बंदकर गायब हो गया है। आसपास के केंद्र संचालक भी अपनी-अपनी दुकानें के शटर गिराकर गायब नजर आए।
कस्बा जैथरा में विरासत में नाम दर्ज कराने के नाम पर रिश्वतखोरी का मामला सामने आने के बाद राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है। कस्बे में खुले कई जनसेवा केंद्र इनकी वसूली का केंद्र बन चुके हैं। जिस जनसेवा केंद्र का वीडियो वायरल हुआ है वह राजस्व कर्मियों का अड्डा है।
लोगों का कहना है कि जनसेवा केंद्र पर क्षेत्र के अधिकांश लेखपाल और कानूनगो बैठते हैं। राजस्व से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के बदले सौदे तय होते हैं। तय रकम कभी नकद तो कभी सीधे केंद्र संचालक के पेटीएम खाते में डलवाई जाती है। जिसके बाद संबंधित फाइलें तेजी से आगे बढ़ जाती हैं।
इसके अलावा जैथरा विकास खंड कार्यालय के मुख्य द्वार की पश्चिम दिशा में संचालित एक जन सेवा केंद्र पर विकास कार्यालय से जुड़े कार्य होते हैं। यह केंद्र फर्जी जन्मप्रमाण पत्र के मामले में चर्चा में आया था। इस केंद्र संचालक पर ग्राम पंचायत सचिवों की लॉग इन आईडी है और इसके द्वारा ही सारे भुगतान किए जाते हैं।
अभी कुछ दिन पहले एसडीएम ने इस केंद्र पर छापा मारा था लेकिन किसी तरह संचालक को भनक लग गई और वह ताला डालकर भाग गया। एसडीएम अलीगंज जगमोहन गुप्ता ने मामले की जांच तहसीलदार अलीगंज को सौंप दी है। जबकि वायरल वीडियो में लेखपाल मांगी गई रिश्वत में तहसीलदार और आरआई राजस्व निरीक्षक को भी हिस्सेदार बता रहा है, बावजूद इसके एसडीएम ने मामले की जांच तहसीलदार को सौंप दी। जिससे जांच की निष्पक्षता और शुचिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।