कासगंज। सब्जियों का राजा आलू की फसल पैदा करने वाले किसानों के चेहरे पर चिंता दिखाई दे रही है। उन्हें आलू का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। कम पैदावार होने के साथ खर्चा भी अधिक है। इस बीच लागत निकालना आसान नहीं है। नतीजा है कि मंडी में किसानों को आलू की फसल उचित मूल्य पर बेचने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है जबकि तमाम किसान कम दाम में ही आलू बेच रहे हैं।
कासगंज जिले में आलू की फसल लगभग 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में हो रही है। किसान वैसे तो इस फसल को लेकर पहले से उत्साहित थे, लेकिन जब आलू की फसल में नुकसान होने लगा है तो किसान परेशान हैं। आलू की फसल पर झुलसा रोग का भी प्रभाव होने लगा है। इसके अलावा सबसे अहम बात है कि किसानों को इस फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। 300 रुपये प्रति पैकेट(50 किलो) आलू मंडी में बिक रहा है। पैदावार कम है। इस कारण लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। इधर, आलू की खोदाई का काम किसान तेजी के साथ कर रहे हैं। आलू खोदाई में जुटे किसानों का कहना है कि जनवरी माह में हुई बारिश भी आलू की पैदावार भी प्रभावित कर चुकी है। बारिश के कारण गुणवत्ता में कमी आई है।
यह है नुकसान का आकलन
एक बीघा क्षेत्रफल में बुवाई के दौरान 10 पैकेट आलू लगता है। और पैकेट बीज का औसत रेट 1500 रुपये होता है। इस हिसाब से 15 हजार रुपये एक बीघा बुवाई में खर्च हुए। इसके अलावा लगभग 6 हजार रुपये लागत पर खर्च होता है। जबकि एक बीघा में 70 पैकेट आलू निकलता है और इन दिनों 300 रुपये पैकेट आलू बिक रहा है। इस तरह 21 हजार रुपये ही किसानों को मिल सकेंगे। इस तरह किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ।