स्वाइन फ्लू जैसी घातक जानलेवा बीमारी से ग्रस्त लोगों को जनपद में कोई
राहत नहीं मिलने वाली। उपचार तो दूर यहां इसकी जांच तक की व्यवस्था नहीं
है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के अनुसार ऐसे किसी संदिग्ध मरीज का ब्लड सैंपल
जांच के लिए पीजीआई लखनऊ भेजा जाएगा।
18 लाख की आबादी वाले जिले में
चिकित्सकों और स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। घातक बीमारियों के बाद भी यहां
संबंधित रोग विशेषज्ञ और चिकित्सक नहीं हैं। आगरा में स्वाइन फ्लू की
दस्तक के बाद जहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हड़कंप है वहीं स्थानीय स्तर
पर विभाग की कोई चिकित्सीय व्यवस्थाएं नहीं हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के
अभाव में उपचार तो दूर यहां इस बीमारी की जांच तक की व्यवस्था नहीं है।
इतना ही नहीं अभी तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस बीमारी को लेकर कोई लक्षण
एवं सावधानियां तक जारी नहीं की गई हैं।
28 चिकित्सकों में से मात्र 13 तैनात
जिला
अस्पताल में चिकित्सकों का टोटा है। स्वाइन फ्लू तो दूर यहां सामान्य
बीमारियों के भी चिकित्सक और विशेषज्ञ नहीं हैं। वर्षों बाद भी यहां ईएनटी
चिकित्सक नहीं है। सर्जन, कॉर्डियोलॉजिस्ट, फिजीशियन, स्किन स्पेशलिस्ट,
अनीस्थिसिया, आई सर्जन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी डाक्टर नहीं है। ऐसे
में संपन्न लोग जहां अन्य शहरों में उपचार ले लेते हैं वहीं निर्धन को कोई
उपचार नहीं मिल पाता। जिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि चिकित्सकों का
मांग पत्र विभाग को नियमानुसार प्रेषित किया जाता है।
जिला अस्पताल
में स्वाइन फ्लू को लेकर कोई विशेष चिकित्सीय व्यवस्थाएं नहीं हैं। ऐसे
किसी भी संदिग्ध मरीज का ब्लड सैंपल पीजीआई लखनऊ भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट
के बाद उसे उच्च चिकित्सा के लिए रेफर किया जाएगा। अभी तक ऐसा कोई भी
पीड़ित नहीं आया है।
- डॉ. आरएस शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल, एटा