एटा। काली नदी से बालू का अवैध खनन किए जाने की खबरें अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद प्रशासन की नींद टूटी है। इस अवैध कारोबार को वैध बनाकर राजस्व हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लखनऊ से टीम बुलाकर यहां की बालू का सर्वे कराया जाएगा। इसकी उपयोगिता के आकलन के आधार पर पट्टा नीलामी की जाएगी।
काली नदी से चार थाना क्षेत्रों के गांवों में अवैध रूप से बालू का खनन किया जाता है। खनन माफिया लगातार खनन कर रहे हैं और प्रशासन चुप्पी साधे है। अवैध खनन के इस मामले को अमर उजाला ने 28 और 29 अप्रैल की खबरों में उजागर किया। अवैध खनन की जब परतें खुलीं तो प्रशासन की भी नींद टूटी। डीएम ने खनन पट्टा नीलामी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए आदेश कर दिए हैं। इस पर काम शुरू कर दिया गया है।
एक ओर जहां प्रशासनिक अधिकारी अवैध कारोबार को वैध रूप देने के लिए जुट गया है। तो दूसरी ओर पुलिस और खनन विभाग काली नदी से हो रहे खनन पर पर आंखें मूंदे बैठे है। माफिया लगातार खनन को अंजाम दे रहे हैं। मुफ्त में बालू निकालकर बाजार में मोटी कीमत में बेचा जा रहा है।
अवैध खनन कारोबार के विरुद्ध अभियान चलाने के निर्देश शासन ने दिए हैं। अभियान चलाया भी जा रहा है। प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग की टीमों को संयुक्त रूप से जिम्मेदारी दी गई है। सड़क चलते वाहनों को पकड़कर कार्रवाई की भी जा रही है। लेकिन नदी पर बड़े रूप से चल रहे अवैध खनन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
स्थानीय स्तर पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है कि काली नदी में किन स्थानों पर कितने खनन की क्षमता है। इसके बाद खनन विभाग लखनऊ को रिपोर्ट भेजकर टीम बुलाई जाएगी। जो सर्वे कर यहां की बालू की गुणवत्ता परखेगी। इसके आधार पर पट्टा नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
सुनील कुमार सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व