जिले में आधी आबादी आज भी रोज अपनी हिफाजत सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। महिला उत्पीड़न, सुरक्षा के दावे तमाम होते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी महिलाओं के जेहन में इसका खौफ बना हुआ है। वहीं महिला अपराधों की बात करें, तो सालभर में यह आंकड़ा 800 के पार है। वहीं पुराने मामलों को भी अब तक न्याय नहीं मिल सका है।
केस नंबर-एक
कुछ साल पहले निधौलीकलां क्षेत्र में पांच लोगों ने एक महिला के साथ गैंगरेप करके उसे जिंदा जला दिया गया था। पांच साल भी मामले के आरोपियों को पकड़ा नहीं जा सका है। पीड़िता के परिजन न्याय के लिए चक्कर काट रहे हैं।
केस नंबर- दो
शहर के पीपल अड्डा निवासी एक युवती पर एसिड अटैक का मामला सामने आया था। पुलिस ने मामले का खुलासा करके अपनी पीठ थपथपा ली, लेकिन आरोपी को कुछ दिन बाद ही जमानत मिल गई। पीड़िता की फिलहाल शादी हो चुकी है, लेकिन न्याय की आस अधूरी रह गई।
केस नंबर-तीन
जिले के मारहरा थाना क्षेत्र में एक किशोरी से रेप का मामला सामने आया था। पुलिस ने रेप का मामला तीन महीने बाद दर्ज किया, लेकिन आरोपी नहीं पकड़े जा सके। ऐसे में महिला अपराधों पर लगाम लगाने के दावों की पोल खुलती नजर आई।
जिले में महिलाओं संग हुए अपराध के आंकड़े
वर्ष 2013- 781
वर्ष 2014- 750
वर्ष 2015- 834
वर्ष 2016- 855
परिवार परामर्श केंद्र जोड़ रहा रिश्ते
बढ़ते महिला उत्पीड़न के बीच परिवार परामर्श केंद्र कारगर साबित हो रहा है। महिला थाने में चलने वाले केंद्र में हर दिन पांच से छह शिकायतें पहुंचती हैं। पुलिस अधिकारी, काउंसलर्स और अधिवक्ता मिलकर समझौता कराते हैं और दंपतियों को फिर से मिलाने का काम करते हैं।
इनका कहना है
महिला अपराधों को लेकर सही पहल आवश्यक है। समाज में महिलाओं के प्रति व्याप्त सोच को बदलना पड़ेगा। तभी महिला अपराधों पर लगाम लगाई जा सकती है।
डा. श्यामलता वेद, सदस्या, परिवार परामर्श केंद्र
समाज में महिलाओं को आज भी दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ता है। इसके पीछे खराब मानसिकता प्रमुख कारण है। लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी, तभी सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है।
डा. हरिओम शर्मा, समाजशास्त्री
महिला अपराधों को लेकर व्यापक पहल की जाती है। शिकायत मिलने पर जांच के बाद तत्काल कार्रवाई की जाती है। परिवार परामर्श केंद्र में दंपतियों को मिलाने का काम किया जाता है।
कंचन कटियार, महिला थाना प्रभारी