एटा। दिवाली के नजदीक आते ही आतिशबाज सक्रिय हो गए हैं। अलीगंज, जैथरा और मारहरा विकासखंड क्षेत्र में यह काम अधिक होता है। इसके साथ ही आतिशबाजी का सामान बाहर से लाकर भंडारण भी काम किया जा रहा है। अफसर अभी तक लाइसेंस वाली सभी दुकानों को भी चेक नहीं कर सके हैं। अवैध निर्माण और भंडारण को रोकना उनके लिए बड़ी चुनौती है।
आतिशबाजी को बनाने और भंडारण के लिए अग्निशमन विभाग से लाइसेंस लेना जरूरी होता है। जिले में 26 लोगों ने लाइसेंस लिए हैं। इनमें से 16 का ही नवीनीकरण हुआ है। विभाग के अनुसार नवीनीकरण नहीं कराने वाली दुकानें, गोदाम बंद हैं। नवीनीकृत इकाइयों में 9 देसी आतिशबाजी निर्माण करने वाली हैं। वहीं 7 आतिशबाजी का भंडारण करने वाली हैं। इनमें से अभी तीन ही चालू हैं। लाइसेंस वाली सभी दुकानों पर प्रशासन और अग्निशमन विभाग के अधिकारी चेकिंग कर रहे हैं। वहां मानकों, सुरक्षा संसाधनों आदि को चेक किया जा रहा है ताकि किसी तरह का कोई हादसा न हो।
हालांकि हादसों का खतरा लाइसेंसी से अधिक अवैध इकाइयों में रहता है। लाइसेंस नहीं होने की वजह से इन पर किसी की नजर नहीं जाती और वहां सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता। मारहरा, अलीगंज, जैथरा क्षेत्र में इस तरह की तमाम दुकानें हैं जहां बिना लाइसेंस के देसी आतिशबाजी बनाई जाती है और बाहर से भी आतिशबाजी लाकर भंडारण किया जाता है। जैथरा थाना क्षेत्र के धुमरी में 10 सितंबर की रात अवैध रूप से भंडारण की गई आतिशबाजी में आग लगी थी, जिससे कई दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं। रात का समय होने की वजह से जनहानि बच गई थी।
लाइसेंस वाली दुकानों, गाेदामों का निरीक्षण लगातार किया जा रहा है। कहीं कोई विशेष कमी नहीं मिली है। अवैध रूप से आतिशबाजी के निर्माण या भंडारण की सूचना मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। - प्रशांत कुमार राणा, सीएफओ