एटा। जिले के कई इलाकों में पीने का पानी तक नहीं मिल रहा, लेकिन बहुत सारे क्षेत्रों में लोग जमकर पानी की बर्बादी कर रहे हैं। गांव-गांव में सबमर्सिबल पंप लगे होने की वजह से सबसे अधिक पानी की बर्बादी की जा रही है। जिलेभर में निजी सबमर्सिबल लग जाने के चलते लोग उपयोग में नहीं आने के बाद भी पानी को जमीन से निकालकर नालियों में बहा रहे हैं, इसकी वजह से जलस्तर भी कम होता जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में करीब 20 फीसदी से अधिक पीने वाले पानी को बर्बाद किया जा रहा है। गांव में लोगों ने सरकारी हैंडपंप में ही सबमर्सिबल पंप लगा रखी है जबकि शासनादेश है कि सरकारी हैंडपंप निजी स्थल पर नहीं होगा। इसके बावजूद लोगों ने सरकारी हैंडपंपों को बाउंड्रियों के अंदर कर सबमर्सिबल पंप डाल दिए हैं जिससे वे जानवरों को नहला कर पानी बर्बाद कर रहे हैं। साथ ही एक बाल्टी पानी की जरूरत के लिए ग्रामीण लोग करीब 100 लीटर पानी बर्बाद कर देते हैं। पानी की बर्बादी को लेकर आने वाली पीढ़ी को पानी के लिए तरसना पड़ सकता है। पानी के जलस्रोत का दोहन होने के चलते हर साल करीब चार फीसदी पानी का जलस्तर गिरता जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र में 11 एमएलडी पानी की आवश्यकता
जलनिगम के अधिशासी अभियंता एएस भाटी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में करीब 11.26 एमएलडी पानी की आवश्यकता है जिसके सापेक्ष 560 एलपीसीडी की निकासी की जा रही है। वहीं करीब 40 हजार से अधिक इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि 150 व्यक्ति पर एक हैंडपंप पानी के लिए पर्याप्त होता है। इसके साथ ही 71 नगर पेयजल योजनाएं संचालित हैं।
एक व्यक्ति के लिए करीब 100 लीटर पानी की जरूरत
जलनिगम के अधिशासी अभियंता एएस भाटी ने बताया कि प्रतिदिन एक व्यक्ति को करीब 100 लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है। इससे वह अपने दैनिक कामकाज को पूरा कर सकता है, लेकिन एक व्यक्ति इससे अधिक पानी को बर्बाद कर देता है।