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सूरज ढलते ही पुलिस चौकियाें पर पड़ जाते हैं ताले

Sat, 02 Jul 2016 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
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भगवान भरोसे शहर की सुरक्षा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नगर में ताबड़तोड़ चोरी, लूट, जानलेवा हमले, जहरखुरानी जैसे मामले सामने आ रहे हैं,  लेकिन पुलिस की निष्क्रियता कम नहीं हो रही। इसी के चलते असामाजिक तत्व बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम देते घूम रहे हैं। शुक्रवार रात ‘अमर उजाला’ टीम ने दस बजे नगर की पुलिस चौकी के हालत देखने पहुंची तो कही पुलिस चौकी पर ताला लगा मिला तो कहीं सिर्फ एक सिपाही बैठा मिला और कहीं पुलिस कर्मी चौकी का गेट बंद कर अंदर कैजुअल ड्रेस में आराम फरमाते दिखाई दिए। 
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रेलवे रोड स्थित इंद्रपुरी पुलिस चौकी में रात सवा दस बजे ताला लगा मिला। जबकि इस मार्ग से ट्रेन यात्रियों के अलावा हर समय लोग गुजरते हैं। जर्जर दिखाई देने वाली पुलिस चौकी पर एक भी पुलिस कर्मी नहंीं मिला। स्थानीय लोगाें से पूछने पर पता चला कि आप किसी भी वक्त आएं पुलिस चौकी में ताला ही लगा मिलेगा। 
 
वनगांव में पुलिस चौकी पर पंचायत भवन बनने के कारण एक साल पूर्व उसे बस अड्डे पर शिफ्ट कर दिया गया है। लेकिन चौकी पर कमरा तो बना है, लेकिन वहां पुलिस चौकी बोर्ड का नामोनिशान तक नहीं है। एक सिपाही बंद कमरे के गेट पर कुर्सी डाले मिले। पूछने पर सिपाही को पता नहीं कि चौकी इंचार्ज कौन है और चौकी में कितना स्टाफ है।
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अलीगंज रोड स्थित मंडी परिसर में बनी पुलिस चौकी में वहां काम करने वाले मजदूर रहते है। मजदूरों से पूछने पर पता चला कि उन्हें चौकी इंचार्ज का नाम तक पता नही है। मजदूरों ने बताया कि यहां कभी कोई दरोगा या सिपाही नहीं आता। चौकी में बाहर से ताला पड़ा था। हालात देख कर लग रहा था कि वास्तव में पुलिस चौकी में कोई रहता ही नहीं।

हाईवे-91 के किनारे शहर के बाहर स्थित टीपी नगर पुलिस चौकी में ताला लगा मिला। चौकी के बाहर टेंपो समेत कई वाहन खडे़ थे, लेकिन उनकी रखवाली करने वाला कोई नहीं था। एक कुर्सी भी चौकी के बाहर पड़ी थी। आसपास लोगों से पूछने पर पता चला कि पुलिस चौकी कभी-कभी खुलती है, जबकि कोई मामला आता है। वर्ना बंद रहती है। 

कासगंज रोड स्थित लिप्टन पुलिस चौकी का गेट अंदर से बंद था। बाहर देखने से लगता ही नहीं कि यहां कोई पुलिस चौकी है। बस रोड के किनारे पुलिस चौकी के बैरियर खड़े दिखाई दिए। आसपास फैक्ट्री में काम करने वाले लोगों ने बताया कि चौकी में तैनात पुलिस कर्मी शाम होते ही अंदर से गेट लगा लेते हैं और सुबह चार बजे मार्ग पर बैरियर लगाकर वसूली होती है। फैक्ट्री में काम करने वालाें की माने तो यहां चौकी होने के बाद भी सुरक्षा नहीं है। 

पटियाली गेट पुलिस चौकी पर कार्यालय खुला था उसके बगल वाला गेट थी खुला होने के अलावा अंदर से पुलिसकर्मियों की आवाज आ रही थी। लेकिन पुलिस चौकी के बाहर क्या हो रहा है किसी को पता नहीं। हम जब कार्यालय में घुसने लगे तो एक सिपाही बरमूडा और टीर्शर्ट पहने बाइक  से पहुंचा और क्या हो रहा है कहकर अंदर चला गया। 
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