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...तो बदल जाएगी एटा की तस्वीर

Sat, 13 Dec 2014 11:52 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला एटा
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अगर सबकुछ ठीकठाक रहा और गेंद अपने पाले में ही रही तो एटा का विकास होता नजर आएगा। अल्ट्रा मेगा पॉवर प्रोजेक्ट के तहत स्थापित होने वाली इकाई के लिए सकीट रोड पर चिन्हित की गई जगह का सर्वे करने के लिए शुक्रवार को केंद्रीय टीम एटा पहुंची।
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टीम ने जगह का मौका मुआयना किया और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ संबंधित सभी विभागों के अधिकारियों से बातचीत की है। अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी।

राज्य सरकार द्वारा हरी झंडी दिए जाने के बाद यह इकाई यहां स्थापित होगी। इस इकाई के स्थापित होने के बाद 4000 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।

दो हजार मेगावाट बिजली यूपी व शेष बिजली देश के अन्य राज्यों को मिलेगी। इस योजना पर 30 हजार करोड़ रुपये का खर्चा आएगा और शुरू होने में दो-ढाई साल लगेंगे।
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बता दें कि प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस योजना को स्थापित कराने के लिए एटा व शिकोहाबाद का चयन किया है। बताते हैं कि यहां के विकास के लिए प्राथमिकता एटा को दी जा रही है। टीम गुरुवार को शिकोहाबाद में चयनित की गई जगह को देख चुकी है।

शुक्रवार को एटा पहुंचे केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के निदेशक एसके मंडल, उप निदेशक कमल सेठी, केंद्रीय जल आयोग के निदेशक नीरज कुमार, पॉवर फाइनेंस कोरपोरेशन के उपाध्यक्ष संजय राय व चीफ इंजीनियर सिविल विद्युत विभाग एसके शर्मा ने सबसे पहले पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में एसडीएम सदर अजीत कुमार सिंह, विद्युत विभाग के अलावा वन, सिंचाई, प्रदूषण, नहर व रेलवे के टूंडला से आए अधिकारियों के अलावा अन्य संबंधित लोगों से जगह व योजना से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा की।

इसके बाद जिलाधिकारी निधि केसरवानी से मुलाकात की। इसके बाद सकीट क्षेत्र में जिला प्रशासन द्वारा चयनित की गई जगह को देखा। बता दें कि प्रदेश के मुख्यमंत्री का यह डीम प्रोजेक्ट है। उन्होंने प्रदेश में इसे स्थापित कराने के लिए एटा व शिकोहाबाद को चुना है। किसी एक जगह यह इकाई स्थापित होगी। तत्कालीन डीएम सेल्वा कुमारी जे ने सकीट क्षेत्र में जगह प्रस्तावित कर शासन को रिपोर्ट भेजी थी।

यहां पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में दिल्ली से आई टीम के अधिकारियों ने बताया कि सकीट के पास जगह चिन्हित की गई है उसी का सर्वे करने आए हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 22 सौ एकड़ जमीन चाहिए। सकीट के आसपास के लगभग 10 गांव इसके दायरे में आएंगे। इस प्रोजेक्ट को लगाने के लिए बंजर जमीन काफी उपयोगी होगी।

साथ ही पानी भी आसपास होना चाहिए। 30 हजार करोड़ रुपये खर्चा आएगा। वह अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेंगे। राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद इसे स्थापित कराने का काम दो-तीन साल में शुरू होगा। वैसे एटा में जो जगह देखी है वह सही है और प्रशासन का भी सहयोग मिला है। उन्होंने बताया कि इस इकाई के स्थापित होने के बाद 4000 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। 2000 मेगावाट बिजली राज्य व शेष केंद्र के अन्य राज्यों को मिलेगी। यहां के लोगों को सस्ती बिजली भी मिलेगी।



बिछेगी रेलवे लाइन, प्रतिदिन 30 मालगाड़ियों में आएगा कोयला
यदि यह प्रोजेक्ट एटा में स्थापित होता है तो यहां अन्य सुविधाओं के साथ-साथ रेलवे लाइन बिछेगी। प्रतिदिन 30 मालगाड़ियों में कोयला यहां आएगा। यहां तक रेलवे लाइन को कहां से जोड़ा जाएगा। इसका निर्णय रेलवे मंत्रालय लेगा। दूसरी तरफ जिले का विकास होने के साथ-साथ बेरोजगारों को भी रोजगार मिलेगा। बता दें कि जिले में मलावन क्षेत्र में जवाहर तापीय परियोजना पर भी काम शुरू हो रहा है। एक साथ दो योजनाएं आने से यहां की तस्वीर बदल जाएगी।
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