लाखों रुपये के पौधारोपण घोटाला खुलने के डर से डिप्टी रेंजर एवं वन रक्षक ने वन में आग लगा दी। इससे 20 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र के हजारों पौधे जलकर राख हो गए। सूचना पर पहुंचे रेंजर ने मामले की सूचना उच्च विभागीय अधिकारियों की दे दी है। आदेश का इंतजार है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में विकसित हरित पट्टी गुरुवार को वन विभाग के लोगों ने जलाकर राख कर दिया। वर्ष 2013 में सैंथरी स्थित 40 हेक्टेयर भूमि में 25 हजार पौधारोपण के लिए 48 लाख रुपये का बजट मिला था। आरोप है कि तत्कालीन सेक्शन आफिसर सुरेंद्र पाल सिंह एवं वन रक्षक सुभाष चंद्र ने मिलीभगत कर लाखों का घोटाला करते हुए इसमें नाम मात्र का पौधारोपण किया था।
इसे लेकर शिकायतें मिल रहीं थीं। 40 दिन पूर्व एक नवंबर 2014 को कार्यभार ग्रहण करने वाले वर्तमान रेंजर सुरेश चंद्र ने उच्च अधिकारी के आदेश पर चार नवंबर को सैंथरी स्थित उस वन का निरीक्षण किया तो दंग रह गए। यहां दर्शाई गई संख्या 25 हजार पौधों के स्थान पर मात्र सात-साढ़े सात हजार पौधे ही जीवित थे, जो मात्र 30 प्रतिशत ही थे। इसकी रिपोर्ट जिला वनाधिकारी को भी दी। डीएफओ ने मौके का निरीक्षण किया और आरोप की पुष्टि होने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति उच्च विभागीय अधिकारियों से की।
रेंजर के अनुसार कार्रवाई से बचने एवं सबूत मिटाने के उद्देश्य से आरोपियों ने गुरुवार को उक्त वन क्षेत्र में आग लगाने की साजिश रच दी। इससे 20 हेक्टेयर से अधिक का वन्य क्षेत्र में नुकसान हुआ है। मामले की सूचना जनपद से बाहर गए डीएफओ व अन्य उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। अधिकारियों के आने पर अगली कार्रवाई की जाएगी। बताते चलें कि साजिश तब की गई जब डीएफओ आउट ऑफ स्टेशन एवं रेंजर दो दिनों के अवकाश पर थे।