जिन गलियों और पगडंडियों पर नौनिहाल उड़ान भरते थे, गुरुवार को वहां सन्नाटा पसरा था। गली में होने वाला बच्चों का शोर भी गायब था। आवाजें सिर्फ सिसकियों की सुनाई दे रहीं थीं। लोग शोक में डूबे रहे। अभिभावकों की चीत्कार और आंसू नहीं थम रहे थे। पूरे गांवों में मातम छाया हुआ था। लोग परिवार को ढांढस बंधा रहे थे।
हादसे के बाद गांव नगला उमेद, गांव बिरियन, नगला रामनगर, पुरंजला, कैला, असदपुर, भगवानपुरा के बच्चों की जान चली गई और कई बच्चे घायल हुए। हादसे में गांव नगला उमेद के तीन बच्चों ने दम तोड़ा तो 21 बच्चे घायल हो गए। नगला रामनगर और बिरियन में भी दो बच्चों की मौत हुई।
बच्चों की मौत के बाद इन गांवों में मातम छा गया। हर ओर से चीत्कार का ही शोर था। हर कोई अपने बच्चों की जानकारी करने लेने के लिए घटनास्थल की ओर दौड़ रहा था। जैसे-जैसे बच्चों के शव मलबे से निकलते रहे, वैसे-वैसे आंखें नम होती रहीं। खौफनाक मंजर को देख हर दिल दहल गया।
कई बच्चों के आई कार्ड गायब कर दिए
हादसे के बाद स्कूल प्रबंधन ने शर्मनाक हरकत की। स्कूल में जैसे ही हादसे की सूचना पहुंची, तो स्कूल कुछ शिक्षक घटना स्थल पर पहुंच गए। बताया जाता है कि शिक्षकों ने बच्चों के शवों से आई कार्ड गायब कर दिए। साथ ही कुछ बच्चों के आई कार्ड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से गायब कर दिए गए। ताकि उनकी पहचान न हो सके।