गाजियाबाद से सिपाही सुखवीर का शव शुक्रवार देर रात जब गांव कुसवा पहुंचा तो कोहराम मच गया। शनिवार को परिवारीजनों और ग्रामीणों ने सिपाही को शहीद का दर्जा देने की मांग करते हुए अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। एसडीएम, सीओ सदर ने मौके पर पहुंच कर परिवार को नियमानुसार सुविधाएं देने और शहीद का दर्जा देने के लिए शासन को लिख भेजने का आश्वासन दिया। तब जाकर शाम तीन बजे परिवारीजनों ने अंतिम संस्कार किया।
कुसबा गांव निवासी चरण सिंह का इकलौता बेटा सुखीवीर गाजियाबाद में कई सालों से पुलिस विभाग में कांस्टेबल पद पर तैनात था, जबकि उसकी पत्नी और तीन बच्चे आगरा के जल बिहार में रहते थे। विगत गुरुवार रात गाजियाबाद के कविनगर थाना क्षेत्र में साथी सिपाही ने गोली मार दी थी, अस्पताल में उपचार के दौरान सिपाही सुखवीर की मौत हो गई थी। शुक्रवार देर रात सुखवीर का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा तो परिवारीजनों में कोहराम मच गया। पिता चरण सिंह इकलौते लाडले पर शव देख रोक नहीं पाए, वहंी पत्नी पत्नी आशा, बेटे अतुल और जतिन, बेटी निधि का रो-रोक कर बुरा हाल था। शनिवार सुबह परिवारीजनों और ग्रामीणों ने मृतक सिपाही सुखवीर को शहीद का दर्जा देने की मांग करते हुए प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद एसडीएम जलेसर एनपी पांडे और सीओ सदर निवेश कटियार मौके पर पहुंचे और परिवार को समझा कर शाम तीन बजे अंतिम संस्कार कराया। एसडीएम ने कहा कि सिपाही के परिवार को नियमानुसर हर सुविधाएं मिलेंगी। शहीद का दर्ज दिलाने के लिए सरकार को पत्र लिखा जाएगा। बेटे अतुल ने मुखाग्नि देकर पिता का अंतिम संस्कार किया तो वहां मौजूद हर इंसान की आंख नम हो गई। पूर्व जिपं सदस्य पप्पू दिवाकर, पालिका चेयरमैन मोहन सिंह हैपी, प्रदीप गुप्ता समेत अनेक लोग मौजूद रहे।