कांवड़ यात्रा पर निकले शाहरुख और शिवा।
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जहां एक ओर समाज में जाति और धर्म की दीवारें अक्सर दूरियां पैदा करती हैं, वहीं दो जिगरी दोस्तों ने मोहब्बत और भाईचारे की एक ऐसी इबारत लिखी है जो हर नफरत का जवाब है। बचपन से शुरू हुई यारी अब आस्था के उस मुकाम पर पहुंच चुकी है जहां मजहब की लकीरें बेमानी हो जाती हैं। आगरा के बटेश्वर के रहने वाले शिवा और उनके जिगरी दोस्त शाहरुख पिछले तीन साल से हर साल कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं।