एटा। सहायक परिवहन कार्यालय (एआरटीओ) के आसपास दुकानों में समानांतर रूप से कार्यालय चलाए जा रहे हैं। यहां ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर संबंधित सभी कार्य सुविधा शुल्क वसूल कर काया जाता है। हालात ये हैं कि कार्यालय में काम करवाने वालों की सुनवाई नहीं होती और बाहर दलालों के माध्यम से चुटकियों में काम हो जाता है। करीब सात साल पहले भी तत्कालीन ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह तंवर ने कार्यालय पर छापेमारी की थी। 7 दलालों को पकड़ा था लेकिन उसके बाद कोई बड़ी कार्रवाई न होने से फिर दलाल सक्रिय हो गए।
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय (सीएमओ) में बुधवार को एक जाली मेडिकल प्रमाण पत्र पकड़ा गया था। एआरटीओ कार्यालय के बाहर संचालित दुकानों पर एक व्यक्ति से किसी दलाल ने 5500 रुपये में हैवी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का ठेका लिया था। लाइसेंस बनाने में होने वाली स्वास्थ्य जांचों का फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र सीएमओ की जाली मुहर और हस्ताक्षर सहित तैयार किया गया। इसे ऑनलाइन कराने के लिए आवेदक को दे दिया गया, जो विभागीय जांच में पकड़ लिया गया। हालांकि पुलिस और अधिकारियों की ढील के चलते एआरटीओ के दलालों पर कार्रवाई न हो सकी और उन्हें बचने का मौका मिल गया। बता दें कि सहायक परिवहन कार्यालय में दलाली का यह पहला मामला नहीं है। कार्यालय के बाहर बनी दुकानें इन कामों का अड्डा बन चुकी हैं। यहां ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस, गाड़ी ट्रांसफर के काम के लिए दलाल सरकारी शुल्क के साथ कमीशन भी वसूलते हैं। समय बचाने के लिए आवेदक अधिक कीमत अदा कर फटाफट काम करवा लेते हैं। लंबे समय से यह गोलमाल यहां चल रहा है। 2018 में यहां ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट रहे आईएएस अधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कार्यालय पर छापा मारा था। उन्होंने कार्यालय के अंदर घुसकर दलाली कर रहे 7 लोगों को गिरफ्तार कराया था। इसके बाद काफी दिन तक यहां दलाली बंद रही थी।
वर्जन
मामला गंभीर है, इसमें गहनता से जांच कर कार्रवाई कराई जाएगी। पता किया जाएगा कि गड़बड़ी सामने आते ही त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं की गई। -सत्य प्रकाश, एडीएम प्रशासन