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सीताराम मंदिर संरक्षित इमारत फिर भी अनदेखी

Sun, 17 Apr 2016 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
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विश्व हेरिटेज दिवस आज - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सूकर क्षेत्र सोरों में कई पुरातात्विक महत्वपूर्ण इमारतें है, लेकिन एक इमारत ही संरक्षित इमारत की श्रेणी में है। यह इमारत है प्राचीन सीताराम मंदिर। कंकड़ पत्थर से बने मंदिर के साथ पौराणिक इतिहास जुड़ा है। संरक्षित संपदा होने के बाद भी इस इमारत के रखरखाव के लिए न पुरातत्व विभाग गंभीर है और न ही आसपास के रहने वाले लोग। 
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सीताराम मंदिर में कई शिलालेख लिखे हुए हैं। मंदिर की दीवारों पर पाली एवं संस्कृत भाषा में करीब 31 लेख लिखे हुए हैं। यह मंदिर ऊंचे टीले पर काफी बड़े क्षेत्र में बना हुआ है। मंदिर का हिस्सा कंकड़ पत्थर से निर्मित है। मंदिर के अंदर पत्थरों के विशाल खंभ लगे हुए हैं। राजा सोमदत्त सोलंकी की इस मंदिर में यज्ञशाला थी। क्योंकि 1440 ईसवीं में सोलंकी वंश के शासकों ने यहां शासन किया था। मंदिर की चाहरदिवारी भी पत्थरों से निर्मित है। तीन दशक पहले से इस इमारत को पुरातत्व विभाग ने संरक्षित इमारत घोषित कर दिया है। शुरूआत में इसके रखरखाव पर ध्यान दिया गया। तमाम पर्यटक इस मंदिर में आते-जाते हैं। 
अब मंदिर के चारों और काफी गंदगी है। जगह-जगह आसपास रहने वाले लोगों ने उपलों के बिटोरे लगा रखे हैं और पशु बांध दिए है। जगह-जगह कंटीले वृक्ष भी उग आए है। बिजली के पोल लगे हुए हैं लेकिन बिजली नहीं। 
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पुरातत्व विभाग गंभीर नहीं - दीक्षित 
सोरो (ब्यूरो)। साहित्यकार डा. राधाकृष्ण दीक्षित का कहना है कि पुरातत्व संपदा होने के बाद भी पुरातत्व विभाग इसके विकास पर गंभीर नहीं है। अक्सर मंदिर बंद रहता है। यहां बिजली, पानी आदि की भी सुविधा नहीं है। बैठने के लिए पार्क आदि की भी इंतजाम नहीं किया है। संरक्षित इमारत पर इतिहास का भी उल्लेख नहीं किया है, जिससे आने-जाने वाले पर्यटक निराश होकर लौटते हैं।
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