पीड़िता कंठश्री ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया था। कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, लेखपाल सहित 17 लोगों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत हुआ है।
एटा के जलेसर में छह साल पुराने जमीन के एक फर्जीवाड़े मामले में अदालत के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। इसमें तत्कालीन एसडीएम महीपाल सिंह, तहसीलदार बीके छत्रपति, लेखपाल सहित 17 लोगों को आरोपी बनाया गया है। सीजेएम कोर्ट के आदेश पर अवागढ़ थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है।
विज्ञापन
मामला अवागढ़ थाना क्षेत्र के गांव खटौटा का है। कंठश्री निवासी गांव धौर्रा थाना एत्मादपुर जिला आगरा ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें लिखा है कि पिता बनारसी लाल का अन्य कोई वारिस नहीं था। उन्होंने अपनी सारी चल-अचल संपत्ति की वसीयत उनके नाम कर दी थी। 1 जनवरी 2016 को पिता की मृत्यु हो गई। इसके बाद वह गांव खटौटा आईं और मकान की सफाई कराई, खेतों में खड़ी फसल को काटने की तैयारी कराने लगी।
इस पर गांव के शिवराज, सत्यभान सिंह, प्रेमवती, आधार, प्रदीप यादव आदि लोगों ने विरोध करते हुए कहा कि तुम्हारा यहां कुछ नहीं है। तुम्हारे पिता 1997 में ही सारी संपत्ति हमको बेच चुके थे जिसका उन्होंने बैनामा भी दिखाया।
कंठश्री ने इस बैनामे को फर्जी बताते हुए कहा पिता ने संपत्ति नहीं बेची थी। इस मामले की शिकायत एसडीएम जलेसर से की। वर्ष 2019 में तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, लेखपाल ने कंठश्री को बिना सुने और पत्रावली का बिना निस्तारण किए पैसों का लेनदेन कर आरोपियों के पक्ष में आदेश कर दिया।
इसके विरोध में कंठश्री ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। क्षेत्राधिकारी जलेसर ने बताया कि पूर्व का मामला है, जिसमें कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, लेखपाल सहित 17 लोगों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत हुआ है। जांच कराई जाएगी।
इनको बनाया गया है आरोपी
मामले में तत्कालीन एसडीएम महीपाल सिंह, तत्कालीन तहसीलदार वीके छत्रपति, लेखपाल महेश यादव, राजस्व निरीक्षक, शिक्षक पदम सिंह के अलावा गांव के शिवराज, संतुआ, अनिल, विजय सिंह, सत्यभान सिंह, विजय सिंह, कायम सिंह, सत्यवीर, धर्मवीर, गांव कटेलिया की प्रेमवती, आधार, प्रदीप यादव को आरोपी बनाया गया है।