एटा। सकीट ब्लॉक की ग्राम पंचायत नगला हरिकिशनपुर में मनरेगा में मनमानी की जा रही है। जिसकी वजह से जरूरतमंद लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान ने अपने ही घर परिवार को लोगों के जॉबकार्ड बना दिए हैं। जिसकी वजह से जिनको काम मिलना चाहिए उनको नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का कहना ये भी है कि ग्राम पंचायत में जेसीबी मशीन से काम कराकर मनरेगा से पैसा निकाला जाता है।
ग्रामीणों ने बताया कि यहां पिछले दिनों सरकारी नलकूप से लेखराज के खेत तक सिंचाई नाली और ब्रजेश के खेत से इनाम सिंह के खेत तक चकमार्ग का काम जेसीबी से करा लिया। जबकि अभिलेखों में इसे मनरेगा से दिखाया गया है। गांव में गरीब ग्रामीण जहां मनरेगा में काम करके अपना जीवन यापन करते हैं। वहीं प्रधान की मनमानी से ये लोग रोजगार के लिए भटक रहे हैं। जिसकी वजह से ये लोग मजदूरी करने सकीट या फिर जिला मुख्यालय पर आते हैं। जिसके बाद दिन भर भूखे-प्यासे रहकर ये लोग मेहनत करते हैं तब जाकर दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर पाते हैं।
दिल्ली में नौकरी फिर भी मनरेगा से ले रहे मजदूरी
नगला हरिकिशनपुर में रहने वाला एक व्यक्ति का मनरेगा में भी जॉबकार्ड बना हुआ है। साथ ही वह दिल्ली में भी नौकरी कर रहा है। इस तरह वह व्यक्ति सरकार से पैसा लेकर दूसरे के हक पर भी डाका डाल रहा है। वहीं नौकरी कर अच्छा-खासा कमा भी रहा है। -शिशुपाल सिंह, नगला हरिकिशनपुर
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शारीरिक रूप से अक्षम भी कागजों में कर रहे मजदूरी
कुछ लोग शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद भी मनरेगा में काम कर रहा हैं। एक दंपती ऐसा है जो पूरी तरह से दिव्यांग है। इसके बाद भी उनका मनरेगा में जॉबकार्ड बना हुआ है। जो लोग शारीरिक रूप से अक्षम हैं वो बेचारे कैसे काम कर पाएंगे। -रनवीर सिंह, नगला हरिकिशनपुर
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जॉबकार्ड तो किसी का भी बन सकता है। वहीं कहीं और काम करते हुए मनरेगा से भुगतान प्राप्त करने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। फिर भी मनरेगा के तहत ग्राम पंचायत में कहीं कोई लापरवाही हो रही है तो जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - फैसल आलम, बीडीओ सकीट
अगर कोई पैरों से दिव्यांग है फिर भी उसका जॉब कार्ड बन सकता है। ऐसे लोगों को पानी पिलाने के लिए रखा जा सकता है। -प्रभुदयाल, डीसी मनरेगा