जिले में प्रदूषण का असर साल दर साल बढ़ता जा रहा है। अंतर इतना है कि अब तक प्रदूषण का असर केवल दो या तीन माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर बढ़ता था, लेकिन अब यह हालात मानकों को क्रॉस कर गया है। ऐसे में स्थिति खतरनाक होती जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण को लेकर की जा रही अनदेखी सेहत ये खिलवाड़ तो है ही, साथ ही भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है। अब हमें सिर्फ सावधानी की जरूरत है।
जिले में प्रदूषण को लेकर हालात अब तक सामान्य थे। वाहनों का बढ़ता बोझ, धुआं उगलते वाहन, शहर के किनारे जलते कूड़े का धुआं समेत तमाम कारण प्रदूषण में इजाफा कर रहे थे, लेकिन वातावरण पर खास असर नहीं था। लेकिन दिवाली के बाद पटाखों और धुएं ने धुंध का जो धमाका किया है, उससे हर कोई हलाकान है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की माने तो शहर की आबोहवा में सल्फर डाइ ऑक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड के अलावा संस्पेडेड पार्टीकल्स ऑफ मैटर की मात्रा मानक के अनुरूप 120 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर होनी चाहिए, जो कि दिवाली के बाद कई गुना बढ़ चुकी है। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले वर्ष वातावरण पीएम की मात्रा 94 थी, जो कि इन दिनों 135-140 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच चुकी है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण को सजग होने की जरूरत है। अलीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी डा. केपी सिंह ने कहा कि मानक से अधिक स्थिति प्रदूषण और इसके विपरीत असर को स्पष्ट करती है। इसलिए लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने की जरूरत है।
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कहते हैं आंकड़े
ध्वनि प्रदूषण
वर्ष प्रदूषण की इकाई
2013 75 से 80 डेसिबल
2014 80 से 92 डेसिबल
2015 85 से 95 डेसिबल
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वायु प्रदूषण (माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर)
वर्ष पीएम एसओ एनओ
2014 87 36 41
2014 93 38 44
2015 94 40 49
2016 अब तक 130 46 55
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बढ़ती धुंध ने बढ़ाई दुश्वारियां
सोमवार को धुंध का असर बरकरार रहा। लोग घरों से मास्क लगाकर निकले। सुबह-शाम धुंध के साथ सर्दी का अहसास हुआ। उधर, धुंध बढ़ने से लोगों में बीमारियों का अंदेशा भी बना रहा। लोगों को आंखों में जलन, घुटन और सांस लेने में तकलीफ हुई। जिला अस्पताल की ओपीडी में इन परेशानियों से ग्रसित मरीजों की संख्या ज्यादा रही। लोगों ने खांसी, जुकाम, आंखों को लेकर परामर्श लिया। सीएमएस डा. एके चतुर्वेदी ने बताया कि बढ़ते वायु प्रदूषण से लोगों को धुंध से बचकर रहने की जरूरत है।